Twitter Became The Support Of Disgruntled Congress Leaders After The Letter Said History Remembers The Brave, Not The Coward ANN | लेटर के बाद ट्विटर बना कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का सहारा, कहा

Twitter Became The Support Of Disgruntled Congress Leaders After The Letter Said History Remembers The Brave, Not The Coward ANN | लेटर के बाद ट्विटर बना कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का सहारा, कहा

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नई दिल्ली: कांग्रेस के अंदर पार्टी नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का मुद्दा ठंडा नहीं पड़ रहा है. भले ही इस पर वर्किंग कमिटी की बैठक हो गई और अगले कांग्रेस अध्यक्ष के चयन तक सर्वसम्मति से सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष के पद पर बने रहने की घोषणा कर, विवाद सुलझा लिए जाने का दावा किया गया, लेकिन हकीकत इससे अलग है. सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर सवाल उठाने वाले वरिष्ठ नेताओं का खेमा यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उनका मूल मकसद पार्टी की मजबूती है. इसके साथ ही साथ ये नेता पार्टी के अंदर अपने आलोचकों को पूरी चिट्ठी पढ़ने की नसीहत भी दे रहे हैं और साथ ही परोक्ष रूप से उन्हें डरपोक भी बता रहे हैं.

CWC की बैठक के अगले दिन चिट्ठी गुट के प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने अपनी बात सार्वजनिक रूप से कहने के लिए ट्विटर का सहारा लिया. सबसे पहले राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने लिखा, “दोस्तों हम असंतुष्ट नहीं, पुनरुद्धार के प्रस्तावक हैं. हमारा पत्र पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने के लिए नहीं बल्कि पार्टी को मजबूत करने के लिए जरूरी कदमों की झलक थे. सत्य सबसे अच्छा बचाव है चाहे वह अदालत हो या सार्वजनिक मामले. इतिहास बहादुर को याद रखता है, डरपोक को नहीं.”

कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने तन्खा की बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा, “जिन्होंने पत्र को एक अपराध के रूप में देखा, जल्द ही उन्हें भी एहसास होगा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे विचार के लायक हैं.”

इसके बाद राज्यसभा में उप नेता विपक्ष आनंद शर्मा भी इस ट्वीट-चर्चा में शामिल हो गए. आनंद शर्मा ने वासनिक की प्रशंसा करते हुए लिखा, “पत्र हमारे दिलों में पार्टी के सर्वोत्तम हित की भावना से साथ लिखा गया था जिसमें देश में वर्तमान माहौल और संविधान के मूलभूत मूल्यों पर निरंतर हमले को लेकर साझा चिंताओं को व्यक्त किया गया.” आनंद शर्मा ने आगे लिखा, “बीजेपी से भिड़ने के लिए भारत को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है. ईमानदारी से पार्टी के नवीनीकरण के सुझाव असहमति नहीं हैं. काश सभी साथियों ने इसे पढ़ा होता.”

वहीं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया “यह किसी पद के लिए नहीं बल्कि मेरे देश के लिए है जो सबसे ज्यादा अहम है.” सिब्बल के करीबी लोगों के मुताबिक इस ट्वीट का मतलब यह है कि सिब्बल और उनके साथ अन्य नेताओं ने जो मुद्दे उठाए हैं उसका मकसद पद हासिल करना नहीं, पार्टी संगठन में सुधार करना है. सिब्बल का कहना है उनके लिए देश बड़ा है. मतलब बेहतर कांग्रेस देश के लिए जरूरी है.

हालांकि लेटर के बाद ट्विटर पर अपनी बात कहने वाले कांग्रेस नेता मीडिया से सीधी बात नहीं कर रहे. इससे पहले, नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सोनिया गांधी को शिकायती चिट्ठी लिखने वाले नेता सोमवार को हुई वर्किंग कमिटी की वर्चुअल बैठक में अलग थलग पड़ गए और चिट्ठी लिखने के कारण उन्हें खूब खरी-खोटी सुननी पड़ी. सीडब्ल्यूसी बैठक के फौरन बाद गुलाम नबी आजाद के घर चिट्ठी गुट के नेताओं की बैठक हुई जिसमें मुकुल वासनिक, मनीष तिवारी, शशि थरूर आदि नेता शामिल हुए. हालांकि इनकी आगे की रणनीति साफ नहीं है लेकिन सूत्रों की मानें तो यह गुट कांग्रेस में ‘आंतरिक लोकतंत्र’ को लेकर आवाज उठाता रहेगा.

फिलहाल इस गुट की कोशिश है कि सोनिया गांधी की मदद के लिए बनने वाली कमिटी में इनकी या इनके प्रभाव वाले नेताओं की ज्यादा हिस्सेदारी हो. साथ ही भविष्य में होने वाले सांगठनिक बदलाव में भी महत्वपूर्ण पद चाहते हैं.

चिट्ठी लिखने वाले नेता दबी जुबान में कहते हैं कि अगर सोनिया गांधी अस्वस्थ हैं तो उन पर रोजमर्रा के कामकाज का बोझ क्यों लादा जा रहा है और अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद संभालने के लिए तैयार नहीं हैं तो किसी ‘सक्षम’ गैर गांधी को अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया जाता? हालांकि यह बातें खुल कर बोलने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा. औपचारिक रूप से इन नेताओं की तरफ से यही कहा जा रहा है कि उनका मकसद सोनिया-राहुल को चुनौती देना नहीं बल्कि पार्टी की कार्यप्रणाली में सुधार लाना है.

दूसरी तरह पार्टी में राहुल गांधी के नेतृत्व की पैरवी करने वाले नेता दावा करते हैं कि असंतुष्ट नेता अपने निजी करियर का भविष्य खतरे में पा कर दबाव की राजनीति कर पद और प्रभाव हासिल करना चाहते हैं. सिब्बल ने अपने ट्वीट में इसी आरोप का झुठलाने की कोशिश की है.

असंतुष्ट खेमे को लेकर महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कई अनुभवी और दिग्गज नेता तो हैं लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा को छोड़ कर किसी के पास अपना जनाधार नहीं है. यही कारण है कि इस गुट का फिलहाल कोई भविष्य नजर नहीं आता है. इस गुट के कई नेता भी विवाद खत्म होने की बात कह रहे हैं. लेकिन मुख्य चेहरों का ट्विटर तेवर देखकर यही लगता है कि कांग्रेस में अंदरूनी उथल-पुथल अभी जारी रहेगी.

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