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बलात्कार एक प्रतिक्रिया या कुंठा ?



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कोई भी दवा तब तक बेतुकी है जब तक उसकी जरूरत के बिना दे दी जाती है। पोर्न, उघड़ा पन, कामुक इशारे, आलिंगन की दृश्य बेवजह दी गई दवाइयां है जिसका साइड इफेक्ट बलात्कार, फब्तियां ,छेड़छाड़ ओर महिला उत्पीड़न है। महिला सम्मान ओर महिला अधिकार के साथ महिला स्वतंत्रता की बाते भी कई दशकों से हो रही है जिसके फलस्वरूप आज समाज में महिलाओं का योगदान व्यापार, नोकरी ओर प्रशाशन के साथ राजनीति ओर मिलिट्री में भी बड़ा है। प्राचीन भारत में बलात्कार ओर महिला उत्पीड़न के किस्से सुनने पड़ने में नहीं आते?

यहां तक कि समाज में इस बेमेल सेक्स से बचने के लिए “सती प्रथा” जैसी कुरीति भी पनपी थी जिसने पति के देहांत के बाद पत्नी सती हो जाती थी ताकि भाववेश ओर सेक्स की जरूरत में किसी पराई आस पड़ोस के मर्द से संबंध बनाकर समाज को विकृत ना कर सके।

जैसे जैसे समाज की नजरे एवम् नज़रिया महिलाओं के प्रति बिगड़ने लगा वैसे वैसे महिलाओं के लिए घूंघट प्रथा जैसे नियम लागू होते गए ओर नदियों कुवो पर भी महिला घाट एवम् महिला कुवे पुरुषों से अलग रखने कि परम्परा विकसित होती गई। चूंकि महिला सम्मान ओर महिला अधिकार दोनों ही तथाकथित पुरुष प्रधान( पुरुष प्रधानता का कारण देवीय रचनाओं के चलते हुई रही होगी जिसमें महिलाओं का रजोनिवृत्ती से लेकर गर्भधारण कारण ओर शिशु को स्तन पान ओर उसके पालन पोषण के लिए) समाज में समय समय पर विश्लेषण, फेरबदल ओर समालोचना होती आई है।

पिछले 3-4 दशकों में डिजिटल युग एवम् फिल्मी पर्दे पर महिला एवम् पुरुष के बदन कि नुमाइश उसकी कला ,योग्यता ओर बुद्धि की तुलना में ज्यादा खुलकर प्रदर्शित की गई है यह बात कोई भी नहीं झूंटला सकता। हाल ही के दौर मै “पोर्न” नाम का सेक्स केंसर भी समाज में फेला है जिसमें उम्र, कद – काठी , जानवर ओर पशु पक्षी तक के साथ मानव सेक्स को पारोसा जा रहा है जिससे समाज में महिला एवम् पुरुष दोनों के मन में प्रतिक्रिया एवम् कुंठा का जन्म जरूर होता होगा।

आज के आधुनिक समाज में महिलाओं के लिए जिगोलो उपलब्धता भी महिला प्रधानता की ओर संकेत करता है। समाज ओर शरीर दोनों ही नियम कायदे कानून बनाने महत्वपूर्ण होते है जिसके कारण बालिग nabalige भेद सर्वज्ञात ओर सर्वमान्य है। शारीरिक एवम् हार्मोनल रूप से महिला एवम् पुरुष की रचना ईश्वर ने अलग ही की है ओर उन दोनों के बीच पनपने वाले रिश्तों या सेक्स को केसे कब ओर क्यो परोसना भी शोध का विषय है।


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Sach News Desk

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