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लॉकडाउन: जरूरी सेवाएं जारी, इनको है छूट

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नोएडा
देश में जारी 21 दिनों के लॉकडाउन में सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह से ठप कर दी गई है। केवल आपातकालीन वाहनों को ही आने-जाने की अनुमति है। ऐसे में डॉक्टर, ऐम्बुलेंस और मीडिया को ‘जरूरी सेवाओं’ में शामिल किया गया है, जिनके आवागमन पर प्रतिबंध नहीं रहेगा।

दरअसल, देश में 21 दिनों का लॉकडाउन 14 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान हाइवे और प्रदेश की सीमाएं सील कर दी गई हैं। केवल जरूरी वस्तुओं की सप्लाई करने वाले ट्रक, अनिवार्य सेवाओं से संबंधित सरकारी वाहन और एंबुलेंस ही आ-जा रही हैं। दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाइवे (डीएनडी) पर मीडिया, ऐंबुलेंस और डॉक्टर्स की सेवाओं के लिए बड़ा सा प्लेकार्ड भी रखा गया है। दिल्ली और नोएडा की सीमा पर जरूरी सामानों को लेकर जा रही गाड़ियों की चेकिंग भी की गई।

आपात सेवाओं का काम आसान करने के लिए देश में अस्थायी तौर पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल नहीं लिया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में के संक्रमण को देखते हुए यह घोषणा की। इसके अलावा गडकरी ने अपने ट्वीट में लिखा- सड़कों के रखरखाव और टोल प्लाजा पर आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता हमेशा की तरह जारी रहेगी। यही नहीं पुलिस इक्का-दुक्का प्राइवेट कारों को ही वाजिब कारण बताने पर हाईवे पर जाने की अनुमति दे रही है। ऐसे में टोल नहीं लेने से आपात काल सेवाओं में लगे लोगों को फायदा होगा और वे कम समय में बिना कहीं रुके सुचारू रूप से सेवा दे पाएंगे।

14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी के संबोधन के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन घोषित किया था, जो 21 दिन यानी 14 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान सभी लोगों को सभी सुविधाएं भी मिलेंगी। एक सप्ताह के भीतर राष्ट्र के नाम अपने दूसरे संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘हमें कोरोना वायरस के फैसले की सीरीज को तोड़ना है। आज के फैसले के तहत तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाजे पर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है और आपको समझना है कि आपका घर से निकलने वाला एक कदम कोरोना को घर में ला सकता है।’

भारत में कैसे हैं हालात?
देशभर में कोरोना वायरस से इन्‍फेक्‍टेड लोगों की संख्या बुधवार को 606 हो गई। हालात की समीक्षा के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की अध्यक्षता में मंत्री समूह की मीटिंग हुई। इसके बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 553 मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

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