सरकार द्वारा पारित की गई तीनों विधेयक

सरकार द्वारा पारित की गई तीनों विधेयक

अरुण श्रीवास सच न्यूज़ बिलासपुर-

सरकार द्वारा पारित की गई तीनों विधेयक:
1. कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल,
2. आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल,
3. मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल है.।
केंद्र सरकार के द्वारा इन विधायकों के संबंध में जो बातें कहीं जा रही है, वह किसानों कोगुमराह करने वाली है। इससे किसानों को पूरा नुकसान होगा उनकी उपज पर बड़ी-बड़ी कंपनियों और बिचौलियों का कब्जा हो जाएगा। किसानों के फसल बेचने के समय दाम घटा दी जाएगी और जब किसानों के पास फसल नहीं बचेगा, तब दाम बढ़ा दिया जाएगा। एक तरीके से किसान अपने ही खेत पर मजदूर की तरह हो जाएंगे। सरकार की मंशा किसानों को बड़ी-बड़ी कंपनियों के गुलाम बनाने का प्रतीत होता है।
तीनों विधेयक और उनका असर निम्नानुसार है:
1. कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल के बारे में सरकार का कहना है कि अब किसान अपनी उपज मंडी के बाहर कहीं भी बेच सकते हैं। परंतु किसानों को मंडी के बाहर अपनी फसल बेचने के लिए कभी भी पाबंदी नहीं रही है, सरकार द्वारा किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। मंडी के बाहर प्राइवेट मंडिया बनाई जाएगी। सरकारी मंडियों में सरकार को देने वाली टैक्स के कारण व्यापारी आना बंद कर देंगे। जिससे धीरे-धीरे सरकारी मंडी बंद हो जाएगी और उनके स्थान पर कंपनी की मंडियां ले लेगी, जहां किसानों को उत्पादन औने पौने दामों पर बेचना पड़ेगा सरकार को किसानों के हित में यदि फैसला लेना ही था तो एमएसपी का कानूनी अधिकार प्रदान करना था, किंतु ऐसा नहीं किया जिस कारण इस विधेयक को किसानों को कंपनियों के गुलाम बनाने का विधेयक करार दे रहे हैं।
2. आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल इस विधेयक के जरिए कृषि उत्पादों को भंडारण करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी, उत्पादन की कीमत पर सरकार का कंट्रोल नहीं रहेगा, क्योंकि देश में लगभग 80% से 85% तक सीमांत किसान है। जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम की कृषि भूमि है, जिनके पास अपने फसल का भंडारण करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इतनी कृषि भूमि का उत्पादन लेकर कोई किसान दूसरे राज्यों में फसल बेचने में भी सक्षम नहीं है। कुल मिलाकर अपनी फसल ओने पौने दामों पर कंपनियों को बेचारे मजबूर हो जाएंगे, जिसे इन कंपनियों के द्वारा जमाखोरी कर अत्यधिक ऊंचे दामों पर बाजार में लाया जाएगा। जिससे कंपनी राज स्थापित होने की आशंका बढ़ गई है।
3. मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता इस विधेयक के जरिए किसान के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर कंपनियां जमींदार की तरह किसानों से फसल उत्पादन करवायेंगी और मुनाफा कमायेंगी।
इस प्रकार वर्तमान तीनों कृषि विधायक किसानों के हित में नहीं है। यह किसानों को पुनः कंपनियों के गुलाम बनाने जैसा है। जिसमें किसान अपने ही खेत पर मजदूर हो जाएंगे बाजार पर सरकार का नियंत्रण खत्म हो जाएगी और कंपनी राज के स्थापना हो जाएगी। यही कारण है कि देश भर के किसान व किसान संगठन इन बिलों का विरोध कर रही है। इसलिए किसान हित में इस बिल को वापस लिया जाए।

सूर्यकांत निर्मलकर
प्रदेश उपाध्यक्ष
आम आदमी पार्टी युवा प्रकोष्ठ
मो 9981003606

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES