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पेटदर्द के बाद चला 12 वर्षीय बच्ची के रेप का पता, हाई कोर्ट ने दी 5 महीने का गर्भ गिराने की अनुमति

जबलपुर
रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए ने 12 वर्षीय रेप पीड़िता को गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है। बताया गया कि पीड़िता 19 हफ्ते छह दिन यानी लगभग पांच महीने की गर्भवती है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि पीड़िता मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट के तहत करवा सकती है।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जस्टिस अभ्यंकर ने कहा, ‘पीड़िता सिर्फ 12 साल की है। वह यौन संबंध के लिए सहमति देने के योग्य नहीं है। ऐसे में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है क्योंकि पीड़िता रेप के चलते गर्भवती हुई है।’ कोर्ट के आदेश में कहा गया, ’19 हफ्ते छह दिन की प्रेग्नेंसी को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट के तहत गिराया जा सकता है।’

भ्रूण का कराया जाएगा
जानकारी के मुताबिक, 13 फरवरी 2020 को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉस्पिटल ऐंड मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों की टीम ने पीड़िता का मेडिकल टेस्ट किया था। इस जांच की रिपोर्ट को रेकॉर्ड में लेने के बाद कोर्ट ने निर्देश जारी किए। पीड़िता के वकील बीएस ठाकुर ने बताया कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि भ्रूण का डीएनए टेस्ट करने के लिए उसे फरेंसिक लैब भेजा जाएगा।

आपको बताते चलें कि पीड़िता की ओर से उसकी मां ने गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दायर की है। 4 फरवरी 2020 को पीड़िता के पेट में दर्द होने के बाद जब जांच कराई गई, तब यह पता चला कि वह गर्भवती है। वकील ने बताया कि पीड़िता के परिजन ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई थी।

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