in

आंध्र का ‘माउंटेन मेन, वूमन’ 7 KM सड़क बनाई

विशाखापट्टनम
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम इलाके में राज्य सरकार की उपेक्षा से तंग आकर आदिवासियों के एक समूह ने तीन महीने की मेहनत से 7 किमी लंबी कच्ची सड़क बना डाली। सड़क न होने की वजह से कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे आदिवासियों को इलाके के चार युवकों ने इस काम के लिए प्रेरित किया। इसके बाद तीन हफ्ते तक हर रोज 100 लोगों की टीम सड़क बनाने के काम में जुटी थी।

आदिवासियों ने बीती 23 जनवरी से सड़क बनाने का काम शुरू किया था। तीन हफ्तों की मेहनत के बाद उन्होंने 7 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क को अस्तित्व में ला दिया। इस दौरान उन्होंने हर दिन औसतन ढाई किलोमीटर सड़क बनाई। 9 गांवों के सैकड़ों आदिवासियों ने सीमित स्थानीय संसाधनों की मदद से यह कारनामा कर दिखाया। इस सड़क के बन जाने के बाद इलाके के 250 आदिवासी परिवारों के तकरीबन 1500 लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी।

सरकार ने नहीं सुनी गुहार
बताया गया कि सड़क बनाने को लेकर इन लोगों ने सरकार से कई बार गुहार लगाई थी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सड़क न होने की वजह से असुविधाएं झेल रहे इलाके के चार नौजवानों ने अंत में स्थानीय लोगों की मदद से ही सड़क बनाने का काम शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए 9 गांवों के सैकड़ों लोगों से इस काम से जुड़ने की अपील की। सड़क बन जाने के बाद चौकड़ी के सदस्य पुदुवुला बुचन्ना ने बताया, ‘हमने इलाके के 9 गांवों के सैकड़ों आदिवासियों को खुद सड़क बनाने को लेकर प्रेरित किया। हम खुश हैं कि हमारी मेहनत का नतीजा दिखाई दे रहा है।’

आदिवासी समुदायों में दिखी एकता
सड़क बनाने के इस अभियान के दौरान अक्सर एक-दूसरे से दूर-दूर रहने वाले आदिवासियों के तीन समुदाय के लोग एक साथ श्रमदान करते दिखाई दिए। इन समुदायों में मुका डोरा, कोंडा डोरा और कोंडू आदिवासी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के इस इलाके के लोग सड़क के अलावा और भी बहुत-सी मूलभूत जरूरत की चीजों के अभाव में जीवन जी रहे हैं। बताया गया कि इस इलाके में न तो बिजली की सुविधा है और न ही मेडिकल सेवाएं ही उपलब्ध हैं।

सड़क बनाने को मंजूर हुए थे 40 लाख रुपये
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस इलाके में सड़क बनाने के लिए साल 2018-19 में 40 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। अब आदिवासियों द्वारा सड़क बनाए जाने की खबर सामने आने के बाद अधिकारियों ने उनके काम की सराहना की है। साथ ही इस काम में लगे लोगों को मेहनताना भी देने की बात कही है। एक अधिकारी ने कहा कि यह रोड प्रॉजेक्ट एनआरईजीएस योजना के अंतर्गत थी। ऐसे में जो लोग भी इस सड़क के निर्माण में लगे थे, उन्हें इसका मेहनताना भी दिया जाएगा।

पक्की सड़क बनाएगी सरकार
अधिकारी ने आदिवासियों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक शानदार प्रयास है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। बरसात के दौरान यह सड़क कीचड़ से भर जाएगी। ऐसे में हम इसे पक्की सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। बता दें कि स्थानीय लोग साल 2011 से ही इस सड़क के बनाए जाने का इंतजार कर रहे थे।

Written by admin

विदेशी राजनयिक – कश्मीर में सब ठीक-ठाक है

बिजनस में घाटा, 2 बच्चों संग मां-बाप की खुदकुशी