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coronavirus pandemic: कोरोना वायरस से मुक्त लोगों में इम्युनिटी सिर्फ 6 महीने तक ही रहती है बरकरारः स्टडी – people may only be immune to coronaviruses, says new study

Edited By Akansha Kumari | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

NBT

लंदन

कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त लोगों की इम्युनिटी सिर्फ छह महीने ही काम कर सकती है और इसलिए जिन लोगों को रिकवर घोषित कर दिया गया है उनके फिर से बीमार होने की आशंका बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने यह दावा ऐसे वक्त में किया है जब ब्रिटेन में लोगों को ‘इम्युनिटी पासपोर्ट’ देने की योजना बनाई जा रही है यानी जो लोग संक्रमण से मुक्त हैं उन्हें काम करने व बाहर जाने की इजाजत होगी।

यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम में शोधकर्मियों ने पिछले 35 सालों की अवधि में 10 लोगों पर चार अलग-अलग तरह के कोरोना वायरस का टेस्ट किया है। द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चारों कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में सामान्य कोल्ड की समस्या रहती है और इसमें यह बात जो चिंताजनक रूप से सामने आई है कि उनमें इम्युनिटी की अवधि ज्यादा दिन बरकरार नहीं रहती है। उनका कहना है कि 12 महीने के बाद वे लगातार संक्रमित होते रहते हैं और छह महीने के बाद शरीर से ऐंटीबॉडीज का स्तर घटने लगता है।

उधर, ब्रिटेन में डाउनिंग स्ट्रीट में स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने गुरुवार को घोषिणा की थी कि सरकार ने एक करोड़ ऐंटीबॉडी टेस्टिंग किट बनाने के प्रस्ताव पर साइन किया है। उन्होंने इम्युनिटी बढ़ाने वाले और यह कब तक इंसानों के शरीर में बरकरार रह सकता है, उसके विज्ञान पर जोर दिया। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि मंत्री उस सिस्टम ऑफ सर्टिफिकेट पर काम कर रहे हैं जिसके जरिये कोरोना से सुरक्षित लोगों को काम पर जाने और घूमने की अनुमति दी जाएगी।

उधर, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर ट्रायल होने जा रहा है। इस पर एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी का कहना है कि लोगों को हर साल वायरस से बचने के लिए वैक्सीन लेनी होगी। हालांकि, अभी यह स्टडी शुरुआती स्तर पर है और वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने कोई समीक्षा नहीं की है।

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