भारत

niji sampati per sarkari kabje ki maang, निजी संपत्ति पर सरकारी कब्जे की मांग

Edited By Dil Prakash | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

फाइल फोटोफाइल फोटो
हाइलाइट्स

  • देश के लोगों के पास मौजूद संसाधनों और देश के संसाधनों को इस संकट के दौरान राष्ट्रीय संसाधन माना जाना चाहिए
  • कोरोना के मरीजों, फ्रंटलाइन वर्करों और उनके परिवारों को यूनिवर्सल और मुफ्त हेल्थ केयर सुविधा मिलनी चाहिए
  • राशनकार्ड में शामिल हर सदस्य को हर महीने 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल, 800 मिली खाद्य तेल, 500 ग्राम चीनी मिलनी चाहिए
  • ईपीएफ में पंजीकृत कर्मचारी को नौकरी जाने पर मुआवजा मिलना चाहिए

नई दिल्ली

देश के जाने-माने वामपंथी अर्थशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों और ऐक्टिविस्टों ने देश को मौजूदा आर्थिक, स्वास्थ्य और मानवीय संकट से बाहर निकालने के लिए सभी लोगों की चल-अचल निजी संपत्ति पर सरकारी कब्जे की मांग की है। उनका कहना है कि देश के लोगों के पास मौजूद संसाधनों जैसे नकदी, रियल एस्टेट, संपत्ति, बॉन्ड आदि और देश के संसाधनों को इस संकट के दौरान राष्ट्रीय संसाधन माना जाना चाहिए।

इन बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार ने जो आत्मनिर्भर भारत पैकेज घोषित किया है उसमें आम लोगों की जरूरतों की अनदेखी की गई है। कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण आम लोग की जिंदगी और आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने मिशन जय हिंद के तहत सात सूत्रीय़ कार्य योजना का प्रस्ताव रखा है और सरकार से इस पर अमल करने की मांग की है।

उनकी मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारों को लोगों का जीवन पटरी पर लाने के लिए इस कार्य योजना को लागू करना चाहिए। यह मांग करने वालों में इसे इतिहासकार रामचंद्र गुहा, राजमोहन गांधी, अभिजीत सेन, योगेंद्र यादव और अभिजीत सेन सहित 24 जाने-माने बुद्धिजीवी शामिल हैं। वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ऐक्टिविस्ट कंचन गुप्ता ने इस इसे ट्विटर पर साझा किया और इसे पब्लिश करने के लिए योगेंद्र यादव को धन्यवाद दिया।

प्रवासियों को 10 दिन में भेजें घर

उनकी मांग है कि सरकार को प्रवासियों को 10 दिन के भीतर अपने घर जाने में मदद करनी चाहिए। उन्हें घर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए और ट्रेन तथा बसों का किराया देना चाहिए। राज्य सरकारों को अपने राज्य के भीतर उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन को तत्काल उन्हें भोजन, पानी और आश्रय की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही उन्हें नजदीकी रेल या बस स्टेशन पहुंचाने का भी इंतजाम होना चाहिए।

यूनिवर्सल और मुफ्त हेल्थ केयर सुविधा

कोरोना के मरीजों, फ्रंटलाइन वर्करों और उनके परिवारों को यूनिवर्सल और मुफ्त हेल्थ केयर सुविधा मिलनी चाहिए। कोरोना के लक्षण वाले सभी मरीजों की मुफ्त जांच होनी चाहिए। मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। फ्रंटलाइन वर्करों और उनके परिवारों को एक साल का मेडिकल और इकनॉमिक कवर मिलना चाहिए।

राशनकार्ड पर हर सदस्य को हर महीने 10 किलो अनाज

राशनकार्ड में शामिल हर सदस्य को हर महीने 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल, 800 मिली खाद्य तेल, 500 ग्राम चीनी मिलनी चाहिए। राशन कार्ड में अतिरिक्त नाम जोड़े जाने चाहिए या आपात राशन कार्ड मुहैया कराए जाने चाहिए। सबको राशन की सुविधा मिलने तक स्कूलों में लंगर लगाए जाने चाहिए।

हर परिवार को साल में 200 दिन काम

शहरी और ग्रामीण इलाकों में जॉब गारंटी बढ़ाई जानी चाहिए। मनरेगा के तहत देश में हर परिवार को साल में 200 दिन काम की गारंटी मिलनी चाहिए। शहरों में हर व्यक्ति को 100 दिन ग्रीन जॉब की गारंटी मिलनी चाहिए और इसके लिए 400 रुपये रोजाना मजदूरी मिलनी चाहिए। मनरेगा कार्ड वाले मजदूर को लॉकडाउन के कारण 30 दिन के काम के नुकसान के लिए मुआवजा मिलना चाहिए।

नौकरी जाने पर मुआवजा

ईपीएफ में पंजीकृत कर्मचारी को नौकरी जाने पर मुआवजा मिलना चाहिए। दबावग्रस्त कंपनियों को ब्याज मुक्त लोन मिलना चाहिए ताकि वे कर्मचारियों को आंशिक वेतन दे सकें। सरकार को उन एसएमएसई कंपनियों का छह महीने का ईपीएफ अंशदान देना चाहिए जो अपने कर्मचारियों को लगातार वेतन दे रही हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों को तीन महीने तक 2000 रुपये की एकमुश्त राशि।

किस्त के भुगतान में छूट

किसानों, छोटे कारोबारियों के लिए और हाउस लोन पर किस्त के भुगतान में तीन महीने की छूट मिलनी चाहिए। अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने तक कोई ब्याज नहीं लिया जाना चाहिए। मुद्रा किशोर और शिशु लोन पर छह महीने तक ब्याज और रिपेमेंट नहीं। इस दौरान आदिवासी इलाकों को साहूकारों के भारी भरकम ब्याज दरों से बचाया जाना चाहिए।

लोगों की निजी संपत्ति राष्ट्रीय संसाधन

इन लोगों का कहना है कि देश के लोगों के पास मौजूद संसाधनों जैसे नकदी, रियल एस्टेट, संपत्ति, बॉन्ड आदि और देश के संसाधनों को इस संकट के दौरान राष्ट्रीय संसाधन माना जाना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए केद्र द्वारा जुटाए गए राजस्व का आधा हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाना चाहिए। इस मिशन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और गैर जरूरी सरकारी खर्चों और सब्सिडी को बंद कर देना चाहिए।

Tags
Show More

Related Articles

Back to top button
Close