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कब खत्म होगा कोरोना वायरस

Coronavirus दुनिया से कब खत्म होगा इस बारे में पुख्ता तौर पर तो कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन Singapore University of Technology ने अनुमान लगाया है कि Britain में Coronavirus September और America में November तक खत्म हो सकता है।

Edited By Shatakshi Asthana | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

ब्राजील में खोदी गईं कब्रेंब्राजील में खोदी गईं कब्रें

लंदन

कोरोना वायरस को लेकर लोगों के जहन में कई सवाल चल रहे हैं। खासकर लॉकडाउन में बंद होने के कारण यह चिंता भी सबको खा रही है कि आखिर कब तक ऐसे हालात का सामना करना पड़ेगा। अब वैज्ञानियों ने अनुमान लगाया है कि दुनिया के कुछ देशों में कोरोना वायरस कब तक रहने वाला है। सिंगापुर की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी के इनोवेशन लैब के मुताबिक ब्रिटेन में COVID-19 का संकट 30 सितंबर तक रहने वाला है।

इन देशों में कब खत्म होगा

इसके मुताबिक अमेरिका में इसे खत्म होने में 11 नवंबर तक का समय लगेगा, जबकि इटली में यह 12 अगस्त में खत्म हो जाएगा। वहीं, सिंगापुर को 19 जुलाई में कोरोना वायरस से निजात मिल जाएगी। ये सभी तारीखें मौजूदा हालात, इन्फेक्शन रेट और मौत के आंकड़ों के आधार पर कैलकुलेट की गई हैं। इस वजह से इन मानकों पर असर पड़ने के साथ तारीख बदलने के भी आसार हैं। यह अनुमान इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ दिन पहले ही एक्सपर्ट्स ने दावा किया था कि ब्रिटेन में जून तक कोरोना के कारण मौतों का सिलसिला खत्म हो जाएगा।

रफ्तार पकड़ता मौतों का आंकड़ा

  • रफ्तार पकड़ता मौतों का आंकड़ा

    ब्राजील में COVID-19 संक्रमण के कुल 3,33,937 मामले सामने आए हैं और कुल 21,145 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां संक्रमण के मामले रूस के आसपास हैं, जो कि जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के मुताबिक विश्व में संक्रमण के सर्वाधिक मामलों वाला दूसरा देश है। ब्राजील में शनिवार तक 24 घंटे में 1,001 संकमित मरीजों की मौत हुई।

  • राष्ट्रपति को नहीं चिंता

    इस लातिन अमेरिकी देश में संक्रमण का प्रकोप बहुत अधिक है। इस बीच यहां यह बहस चल रही है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में ढील दी जाए या फिर और सख्त पाबंदियां लगाई जाए। इससे पहले देश के राष्ट्रपति बोल्सनारो कोरोना को लेकर काफी बेपरवाह रहे हैं। उन्होंने कई बार इसके कारण होने वाली मौतों को लेकर खास चिंता नहीं जताने के संकेत दिए और यहां तक कि संवेदनहीन बयान भी दिए।

  • अमेरिका

    ब्राजील की तरह ही अमेरिका में भी इस आपदा की शुरुआत में कड़े कदम नहीं उठाए गए और ढीले-ढाले रवैये से काम किया गया। इस कारण देश में सबसे ज्यादा 16,47,043 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 97,687 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले खुद लॉकडाउन का विरोध करते रहे और वायरस के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे। यहां तक कि लॉकडाउन के कारण होने वाले नुकसान को लेकर उन्होंने ऐसे राज्यों के गवर्नर्स को भी घेरा जहां कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे थे।

  • रूस

    कोरोना वायरस ने सबसे पहले एशिया में चीन को अपना निशाना बनाया था। अब एशिया में सबसे ज्यादा मामले रूस में मौजूद हैं। यहां अब तक 335,882 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं जबकि 3,388 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां मामले तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और अब तक वायरस अपने चरम पर नहीं पहुंचा है। रूस में सबसे ज्यादा खराब हालात राजधानी मॉस्को में हैं। हालांकि, देश में इन्फेक्शन के मामलों को देखते हुए मरने वालों की संख्या पर काफी नियंत्रण है।

  • स्पेन

    यूरोप में इस वक्त सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मामले स्पेन में हैं। यहां अब तक 281,904 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और 28,628 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री पेड्रो संशेज ने दावा किया है कि अब हालात सुधर रहे हैं और जुलाई से विदेशी पर्यटक देश में आ सकेंगे। उनका कहना है कि सबसे बुरा वक्त खत्म हो चुका है। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इसलिए अभी एहतियात बरतने होंगे।

  • ब्रिटेन

    यूरोप में कोरोना वायरस ने सबसे ज्यादा जानें ब्रिटेन में ली हैं। यहां अब तक 254,195 कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं और 36,393 लोगों की मौत हो चुकी है। वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में धीरे-धीरे ढील दी जा रही है। खासकर काम पर जाने के लिए साइकल जैसे तरीकों का इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है।

  • इटली

    यूरोप में कोरोना वायरस का सबसे पहले सबसे बड़ा शिकार इटली बना था। यहां अब तक 228,658 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं जबकि 32,616 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां कोरोना वायरस लॉकडाउन में अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को देखते हुए ढील दी गई। हालांकि, इसके बाद अलग-अलग प्रांतों के मेयर इस बात से नाराज नजर आए कि लोग वायरस को फैलने से रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं।

  • फ्रांस

    फ्रांस में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 182,219 पर पहुंच गई है और 28,289 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अब देश में बिजनस और स्टोर्स खोले जा रहे हैं। साथ ही धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत भी दे गई है। इससे पहले धार्मिक स्थलों को 2 जून को खोला जाना था। साथ-साथ लोगों ने मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अहमियत को भी समझा है और उसका पालन किया जा रहा है।

आखिरी तारीख नहीं

SUT ने इन अनुमान के साथ-साथ चेतावनी भी जारी की है। इसके मुताबिक, ‘मॉडल और डेटा अलग-अलग देशों की दशा के आधार पर काफी जटिल है और बदल भी रहा है। इन्हें लेकर साफ-साफ अनुमान लगाना मुश्किल है।’ साथ ही यह भी कहा गया है कि पहले से तारीख को आखिरी मानकर अति-उत्हासित नहीं होना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि लोगों की गंभीरता कम हो जाए और वे वायरस को काबू में करने के लिए जरूरी कदम उठाना बंद कर दें।

‘हो सकता है न हो वैक्सीन’

वहीं, कुछ दिन पहले ब्रिटिश अधिकारी आलोक शर्मा ने कहा था कि यह संभव है कि यूके कभी कोविड-19 की वैक्सीन ही न ढूंढ सके। उन्होंने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘हमारे वैज्ञानिकों के अथक प्रयास के बावजूद यह संभव है कि हमें कभी सफलतापूर्व कोरोना वायरस की वैक्सीन ही न मिले।’भारतवंशी मंत्री आगे कहा, ‘दुनिया के दो बड़े फ्रंटरनर जिन्हें वैक्सीन बनानी है वे ब्रिटेन में हैं- ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और इम्पीरियल कॉलेज लंदन।’

Web Title new study at singapore predicts coronavirus may end by november in america and by september in britain(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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