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Bihar Board 10th Result 2020: फर्जी मैट्रिक रिजल्ट तो आ गया, आखिर असली कब आएगा जानिए – bseb bihar board 10th result 2020 bihar matric result soon at biharboardonline.bihar.gov.in here how to check

Edited By M Salahuddin | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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Bihar Board Matric Result: शनिवार को बिहार बोर्ड 10वीं क्लास के रिजल्ट (Bihar Board 10th Result 2020) का इंतजार कर रहे छात्रों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा और रहे भी कैसे। काफी लंबे इंतजार के बाद बिहार बोर्ड का रिजल्ट जो आया था। चौंकिए मत। दरअसल, वह असली रिजल्ट नहीं था बल्कि फेक वेबसाइट पर जारी किया गया फर्जी रिजल्ट था। रिजल्ट आने की खबर मिलते ही छात्रों ने धड़ाधड़ अपना रिजल्ट देखना शुरू किया। थोड़ी ही देर में उनको हकीकत का पता चल गया। छात्रों का धोखे में आना भी कुछ हद तक स्वाभाविक था। कई दिनों से मीडिया में रिजल्ट को लेकर खबरें चल रही हैं। ऐसे में फर्जी वेबसाइट पर भी रिजल्ट आया तो छात्रों को लगा कि सच में रिजल्ट आ गया है। अब ऐसे में मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर यह इंतजार कब खत्म होगा और कब बिहार बोर्ड की ओर से मैट्रिक का रिजल्ट जारी किया जाएगा। आइए जानते हैं कि बिहार बोर्ड (Bihar Board) की ओर से इस बारे में क्या जानकारी दी गई है।

Bihar Board Matric Result Date: सोमवार तक आएगा रिजल्ट

बोर्ड की ओर से जानकारी दी गई है कि कुछ तकनीकी खामियों की वजह से रिजल्ट जारी नहीं किया जा सका है। सोमवार यानी 25 मई तक रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, टॉपरों को वेरिफाई करने में थोड़ी मुश्किल हुई थी और इसी वजह से रिजल्ट में थोड़ी देरी हुई है।

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Bihar Board Matric Result Delayed: देरी की वजह को विस्तार में समझिए

वर्ष 2016 और 2017 में बिहार बोर्ड की काफी फजीहत हुई थी। फजीहत का कारण था-बिहार बोर्ड टॉपर घोटाला। वर्ष 2016 में 12वीं क्लास में आर्ट्स टॉपर बनी थी रुबी राय। वहीं, साइंस टॉपर सौरभ श्रेष्ठ और साइंस में थर्ड टॉपर राहुल कुमार बने थे। पत्रकारों ने जब उनका इंटरव्यू लिया तो बड़ा घोटाला सामने आया। वे लोग मामूली सवालों का भी जवाब नहीं दे पाए। जैसे, रुबी राय से जब पॉलिटिकल साइंस बोलने को कहा गया तो उन्होंने उसे ‘प्रोडिगल साइंस’ बताया और कहा कि इसका खाना-पकाना से संबंध है। साइंस टॉपर सौरभ श्रेष्ठ को इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के बारे में ही पता नहीं था। फिर 2017 में आर्ट्स टॉपर बने गणेश कुमार। गणेश कुमार ने एक तो अपनी उम्र छिपाई थी। दूसरा उनको संगीत के बारे में सही से जानकारी नहीं थी जबकि उनको उस विषय में 70 में से 65 नंबर मिले थे।

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इस घटना के बाद से बिहार बोर्ड ने मूल्यांकन की तीन स्तरीय प्रणाली को अपनाया है। इस प्रणाली का पहला चरण तो आम चरण है यानी सभी छात्रों की आंसरशीट या उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन होता है। जब सारी कॉपियों का मूल्यांकन हो जाता है तो उन छात्रों की कॉपियों को अलग कर लिया जाता है जिनके सबसे ज्यादा नंबर आए हैं। करीब 100 ऐसे छात्रों की कॉपियों को अलग कर लिया जाता है। फिर उन कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन किया जाता है। उनके मूल्यांकन के लिए प्रत्येक विषय के विशेषज्ञों की एक कमिटी का गठन किया जाता है। यहां से मामला क्लियर होने के बाद सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले छात्रों या टॉपरों का फिजिकल वेरिफिकेशन या इंटरव्यू होता है। इंटरव्यू भी विशेषज्ञों की एक कमिटी लेती है। इंटरव्यू के लिए छात्रों को पटना बुलाया जाता है लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से वॉट्सऐप या ऑनलाइन ही इंटरव्यू हुआ है। इस पूरी कवायद का मकसद यह आश्वस्त करना होता है कि छात्रों ने अपने दम पर ही नंबर हासिल किया है, किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं किया है।

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Bihar Board Fake Topper List Goes Viral: फर्जी रिजल्ट से पहले वायरल हो चुकी है फर्जी टॉपर लिस्ट

कुछ दिनों पहले बिहार बोर्ड 10वीं क्लास के टॉपरों की फर्जी लिस्ट वायरल हुई थी। जिस टॉपर लिस्ट को वायरल किया गया, असल में वह पिछले साल की टॉपर लिस्ट थी क्योंकि इस लिस्ट में सावन राज भारती को टॉपर दिखाया गया है। सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र सावन राज भारती ने पिछले साल बिहार बोर्ड की मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था। पिछले साल बिहार बोर्ड के 18 टॉपरों में से 16 सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र थे।

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