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चीन ने कोरोना वायरस वैक्सीन के ट्रायल से पहले इस्तेमाल के प्लान पर काम शुरू किया

China ने एक ऐसे प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है जिसके तहत वह Coronavirus Vaccine का इस्तेमाल बिना ट्रायल पूरा हुए कर सकेगा। खास हालात में चुने हुए लोगों पर वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा।

Edited By Shatakshi Asthana | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

प्रतीकात्मक तस्वीरप्रतीकात्मक तस्वीर

पेइचिंग

कोरोना वायरस की वैक्सीन खोजने की रेस में कई देश हैं। हालांकि, इन देशों का मुकाबला सिर्फ आपस में नहीं बल्कि वक्त के साथ भी है। शायद यही वजह है कि चीन ने एक वैक्सीन को बिना ट्रायल्स के ही इस्तेमाल करने के प्लान पर काम शुरू कर दिया है। साल के अंत तक अगर यह वैक्सीन पूरी तरह ट्रायल से गुजर नहीं सकी, तो भी इसके लोगों को दिया जाएगा। इस प्लान पर अभी काम किया जा रहा है और यह तय किया जाना है कि किन लोगों को वैक्सीन दी जा सकेगी।

इसलिए किया जाएगा जल्दी इस्तेमाल

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेन्शन (CDCP) का नैशनल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (NIP) इस पर काम कर रहा है कि किन लोगों को वैक्सीन दी जानी है। दरअसल, चीन में हर दिन सामने आते मामले गिरते जा रहे हैं। ऐसे में वैक्सीन डिवेलप करने वाले संस्थानों को इस बात को लेकर चिंता है कि जबतक वैक्सीन ट्रायल के आखिरी चरण में पहुंचे, कहीं उनके पास तुलना करने के लिए पर्याप्त संख्या ही नहीं बची तो ट्रायल कैसे होगा।

खास हालात में दी जाएगी

CDCP हेड गाओ फू के मुताबिक NIP इस बारे में काम कर रहा है कि किन लोगों को वैक्सीन किस वक्त पर दी जा सकेगी और ऐसी क्या परिस्थिति होगी कि इमर्जेंसी में वैक्सीन दिए जाने का फैसला किया जा सके। इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन में उभरती हुई बीमारियों की हेड मारिया वान कर्खोव ने दावा किया था कि वैक्सीन बनाने को लेकर कोई शॉर्टकट नहीं लिया जाएगा। सेफ्टी और असर को सुनिश्चित करने के लिए यह ध्यान में रखा जाएगा कि कोई प्रक्रिया छोड़ी न जाए।

दो साल में बना ली पहली वैक्‍सीन

  • दो साल में बना ली पहली वैक्‍सीन

    साल 1998 में कंपनी ने दुनिया की पहली सीजियम क्‍लोराइड फ्री हेपेटाइटिस B की वैक्‍सीन बनाई। इसे डॉ एपीजे अब्‍दुल कलाम ने लॉन्‍च किया था।

  • 2006 में बनाई रेबीज वैक्‍सीन

    भारत बायोटेक ने 2006 में कंपनी ने रेबीज की वैक्‍सीन बनाई। तब Rabirix नाम से लॉन्‍च वह क्रोमॅटोग्रैफिकली प्‍यूरिफाइड वैक्‍सीन अब INDIRAB हो गई है।

  • इन्‍फ्लुएंजा टाइप B के लिए भारत की पहली वैक्‍सीन बनाई

    2007 में कंपनी ने इन्‍फ्लुएंजा टाइप B के लिए वैक्‍सीन बनाई। वह इस बीमारी के लिए भारत में बनी पहली वैक्‍सीन थी।

  • 5 बीमारियों के लिए एक वैक्‍सीन पैक

    2009 में भारत बायोटेक ने पेंटावेलेंट कॉम्बिनेशन वैक्‍सीन बनाई। इसे COMVAC 5 के नाम से लॉन्‍च किया गया। इसमें पहले से भरी हुई पांच सीरिंज थीं। ये डिप्‍थीरिया, टिटनस, परट्यूसिस, हेपेटाइटिस B और हीमोफिलस इन्‍फ्लुएंजा टाइप B नाम की 5 बीमारियों के टीके हैं। यह कंपनी का बेस्‍ट-सेलिंग प्रॉडक्‍ट है।

  • स्‍वाइन फ्लू के लिए भारत की पहली वैक्‍सीन

    2010 में कंपनी ने H1N1 स्‍वाइन फ्लू वायरस के लिए भारत की पहली सेल कल्‍चर बेस्‍ड वैक्‍सीन तैयार की।

  • टायफाइड वैक्‍सीन में मारी बाजी

    BBIL ने 2013 में दुनिया की टायफाइड की पहली क्लिनिकली प्रूवेन वैक्‍सीन Typbar TCV लॉन्‍च की।

  • 'मेक इन इंडिया' में बनाई पहली वैक्‍सीन

    साल 2014 में कंपनी ने जापानी इंसेफेलाइटिस के सभी स्‍ट्रेन्‍स की एक वैक्‍सीन JENVAC मार्केट में उतारी। अगले ही साल, भारत बायोटेक ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत पहली वैक्‍सीन बनाई। ROTAVAC नाम की वैक्‍सीन रोटावायरस के लिए बनाई गई थी। वैक्‍सीन को पीएम नरेंद्र मोदी ने लॉन्‍च किया था।

  • जीका वैक्‍सीन के लिए ग्‍लोबल पेटेंट

    जीका वायरस वैक्‍सीन के लिए ग्‍लोबल पेटेंट फाइल करने वाली दुनिया की पहली कंपनी भारत बायोटेक है।

स्पेशल ग्रुप्स को दी जाएगी’

वहीं, गाओ का दावा है कि स्टैंडर्ट ट्रीटेमेंट में 12-18 महीने लग सकते हैं लेकिन फास्ट-ट्रैक वैक्सीन इमर्जेंसी की हालत में काम आ सकेगी। उन्होंने साफ किया कि इसका इस्तेमाल आम लोगों पर नहीं, खास समूहों पर किया जाएगा जिन्हें वैक्सीन दिया जाना जरूरी समझा जाएगा। गाओ का कहना है कि महामारी के विकसित होने के साथ ही कुछ ग्रुप स्पेशल हो सकते हैं। चीन के नैशनल बायोटेक ग्रुप के पार्टी सेक्रटरी झू जिंगजिन का कहना है कि स्पेशल ग्रुप्स में हेल्थ वर्कर्स, डिप्लोमैटिक स्टाफ, बाहर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स और बाहर काम करने वाले लोग शामिल होंगे।

Web Title china working on plan to use vaccine before completing trial of coronavirus vaccine(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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