विचार

Coronavirus In India: कहर पर कहर – hurricanes and locusts with coronavirus

कोरोना माहामारी से पूरा देश परेशान है। इसी बीच दो और प्राकृतिक आपदाएं टूट पड़ी हैं। समुद्री तूफान और टिड्डी दलों का हमला। टिड्डी हमारे खेतों को नष्ट कर रहे हैं

Edited By Shivendra Suman | नवभारत टाइम्स | Updated:

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अभी जब देश अपनी पूरी ताकत झोंक कर कोरोना वायरस से उपजी महामारी का मुकाबला करने में लगा है, तब समुद्री तूफान और टिड्डी दलों के हमलों ने कुछ इलाकों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। अम्फान जैसे तूफान सामान्य स्थितियों में भी ऐसा बड़ा झटका लेकर आते हैं कि उससे उबरने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के साथ इनका मुकाबला करने की कल्पना भला किसने की होगी? वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की बदौलत ऐसे तूफानों में अब पहले जैसी चौंकाने वाली बात नहीं रह गई है।

कई दिन पहले से पता होता है कि तूफान कितनी गति से किस दिन कितने बजे किस इलाके में आएगा। यही वजह है कि बचाव तैयारियां पहले से कर ली जाती है और हताहतों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होने पाती। इसके बावजूद अम्फान तूफान ने ओड़िशा और पश्चिम बंगाल में काफी तबाही मचाई। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में युद्ध जैसी स्थिति का सामना करने की बात कही है।

बहरहाल, अभी की स्थितियों में इस तूफान से दोनों राज्यों में हुए वास्तविक नुकसान की सटीक जानकारी हासिल करने में एकाध हफ्ता लगेगा। सरकारी तंत्र के संसाधन यूं ही काफी सीमित हैं, और उनका बड़ा हिस्सा अभी कोरोना महामारी से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में लगा है। ऐसे में तूफान से दूरदराज के क्षेत्रों में कितने पेड़ गिरे, कितनी सड़कें और पुल टूटे, कितने मकान क्षतिग्रस्त हुए और कितने बड़े इलाके में समुद्री पानी पहुंच जाने से खेतों में सालोंसाल न जाने वाला नमक बिछ गया, यह सब जल्दी पता करने का कोई तरीका सरकारों के पास नहीं है। उधर देश के पश्चिमी हिस्से पर नजर डालें तो पाकिस्तान की खेती तबाह कर रहे टिड्डी दलों के राजस्थान की सीमा को पार करते हुए मध्य प्रदेश के कई जिलों में हरियाली चाट जाने की खबर भी कम गंभीर नहीं है। उज्जैन, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा और आसपास के अन्य जिलों के किसान अभी थाली और ड्रम पीटकर इन टिड्डी दलों को भगाने का जतन कर रहे हैं।

कुछ इलाकों में सरकारी कर्मचारियों ने कीटनाशकों का छिड़काव भी किया है। लेकिन ये उपाय ज्यादा असरदार नहीं साबित हो रहे। एक बार इन टिड्डी दलों को अपनी अगली पीढ़ी तैयार करने का मौका मिल गया तो इन्हें आसपास के राज्यों में फैलने से रोकना लगभग असंभव हो जाएगा और अगले दो-तीन साल तक ये भारतीय खेती का सिरदर्द बनी रहेंगी। इस कोरोना काल में तूफान और टिड्डी दलों के नुकसान से निपटने का काम साथ-साथ करना सरकारी तंत्र के लिए कितना मुश्किल है, यह समझा जा सकता है। कहने की जरूरत नहीं कि केंद्र और राज्य सरकारों को अब तक के सभी आग्रहों-पूर्वाग्रहों को एक तरफ रखकर पूरे तालमेल के साथ ऐतिहासिक चुनौतियों के इस दौर को सफलतापूर्वक पार करना होगा।

Web Title hurricanes and locusts with coronavirus(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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