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7 साल के रूद्र ने खुशनुमा बना दिया था कोविड सेंटर का माहौल, फिट होकर गया घर

नई दिल्ली: 7 साल का रूद्र सिंह। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में बने श्री गुरु तेग बहादुर कोविड केयर सेंटर की रौनक था वो…16 मई को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भर्ती हुआ और रविवार को एक दम फिट होकर सिर पर पगड़ी बांधकर वह अपने घर लौट गया है। टेंशन भरे माहौल और महामारी के खौफ में उसने यहां सबको अपना फैन बना लिया।

रूद्र का मतलब हुआ जो आपकी सारी समस्याएं और चिंताओं का नाश कर दे। बस ऐसा ही है वो…जब दिल्ली में कोरोना के मामले कहर मचा रहे थे, बड़े-बड़े हौसले हारने लगे तब इस छोटे लिटिल चैंप ने सेंटर में मौजूद कई लोगों को अपनी स्माइल और जज्बे से हिम्मत नहीं हारने दी। सेंटर में कोविड नियमों का पालन करना, जो खाने में मिला बच्चों वाले नखरे न कर सबकुछ टाइम पर खाया…डॉक्टरों और नर्स की हर छोटी-बड़ी बात मानी और दवा टाइम पर ली। 15 दिन कड़े रूटीन को फॉलो कर रूद्र ने को हरा दिया और घर जाते वक्त सभी को वादा कर गया कि वह बड़े होकर अब डॉक्टर बनेगा।

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के मेंबर और कोविड सेंटर के इंचार्ज भूपिंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि रूद्र का हमारे साथ एक अलग ही अटैचमेंट हो गया। इसलिए उसको फिट होकर घर जाते वक्त देखकर सभी लोग भावुक हो गए और खुशी के आंसू निकल आए। इस माहौल में ये छोटी-छोटी खुशियां काफी हौसला भर देती हैं। भूपिंदर सिंह ने बताया कि रूद्र यहां अकेला नहीं था। उसका पूरा परिवार यहां भर्ती थी। सभी को सांस लेने में दिक्कत थी, तेज बुखार था और ऑक्सिजन लेवल कम था। इन्हें एडमिट करते ही डॉ. रंजीत वर्मा की टीम ने बाकी मरीजों की तरह इनका भी पूरा खयाल रखा। लेकिन रूद्र तो रूद्र था। पहले दिन से उसने ऐसी कोई बात नहीं की जिससे उसके इलाज करने में किसी को भी दिक्कत आई हो। डॉक्टरों का कहना है कि उसने बच्चा होकर हम सबको अलग ही हिम्मत दी। यहां तक की उसने नर्सिंग स्टाफ के साथ यहां इंजेक्शन लगाना तक सीख लिया। गुरुद्वारा कमिटी के वॉलंटियर्स और नर्सिंग स्टाफ जब कभी थक जाता तो रूद्र के साथ टाइम पास करने के लिए या तो लूडो खेलता या कैरम। सेंटर में उसकी इन्हीं हरकतों ने सभी का दिल लगाकर रखा।

रूद्र ने अपने 15 दिन के एक्सपीरियंस के बारे में बताते हुए कहा कि यहां के लोग काफी अच्छे हैं। सभी डॉक्टरों ने मां-पापा, बहन और मेरी पूरी केयर की। घर से आते वक्त सोचा नहीं था ऐसा माहौल मिलेगा। ये लोग सूई वाले डॉक्टर से ज्यादा मेरे फ्रेंड बन गए। रूद्र ने कहा कि हम लोग जब यहां आए थे तो काफी डर हुए थे लेकिन हम डरे नहीं। इस बीमारी से जमकर लड़े और रविवार को ठीक होकर वापस अपने घर आ गया हूं। मैं सभी लोगों को काफी मिस करूंगा। कुछ का तो नंबर भी लाया हूं…ये दोस्ती ऐसे नहीं टूटेगी।

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