Hamar Chhattisgarhindia

पत्रकार विज्ञापन की राशि मांग ले तो अवैध उगाही और अगर अधिकारी किसी मजबूर से खुलेआम लाखो रु वसूल ले करे तो दिखावे की कारवाही

सारंगढ: हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था कहती है कि देश का कानून सबके लिए एक समान है। लेकिन यथार्थ में यहां ऐसा कुछ देंखने को नही मिलता है। एक देश मे एक ही कानून दो अलग-अलग तरीके से काम करता है। मसलन साधन सम्पन्न और प्रभावशाली लोगों के द्वारा किया गया जघन्य अपराध जो पर्याप्त प्रमाणों के साथ सामने आया हो उसे सामान्य सी कारवाही कर निपटाया जाता है,वहीं किसी आम आदमी की छोटी सी भूल को भी तिल का ताड़ बना दिया जाता है।। इस पर अगर वह आम आदमी पत्रकारिता के पेशे से जुड़ा हुआ हो तो उसे लंबी और बनावटी उलझनों में उलझाना बेहद जरूरी हो जाता है।।

जिले में कानून व्यवस्था से इस तरह का खेल-खेले जाने का उदाहरण इन दिनों सारँगढ़ तहसील क्षेत्र में देखा जा सकता है। वैसे इस तरह के दूसरे दर्जनों मामले प्रदेश के कई अन्य जिलों और शहरों में पहले भी देखे गए हैं। बनावटी अवैध वसूली मार झेल रहे प्रदेश के कई पीड़ित पत्रकारों के ऊपर महज विज्ञापन के पैसे मांगे जाने या सम्बंधित प्रभावशाली व्यक्ति के विरुद्ध प्रमाणित खबरें छापे जाने की वजह से बनाए गए है। आम तौर ओर पत्रकारों के विरुद्ध सिर्फ कागजी शिकायतों को आधार मानकर घटना सत्यता जाने बिना ही उन पर एकतरफा कारवाही कर न केवल अवैध वसूली की धारा 384 ipc के तहत उन्हें फंसाकर जेल भेज दिया जाता है। बल्कि जानबूझकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई जाती है।

लेकिन सारंगढ़ के ग्राम हिर्री में हाल ही में घटी एक घटना जिसमें यहां स्थित वारे क्लिनिक से तहसील के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के द्वारा क्लिनिक संचालक डाक्टर खगेश्वर वारे को डरा-धमका कर उनसे 3 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई थी। इस मामले में घटना से जुड़े साक्ष्यों के साथ पीड़ित की लिखित शिकायत किये जाने के बाद भी इस आपराधिक घटना को अंजाम देने वाले अधिकारियों (जिनमें तहसीलदार सांरगढ़ सुनील अग्रवाल,बी एम ओ सिदार,इंचार्ज थाना प्रभारी के के पटेल,ए एस आई कुसूम कैवर्त व अन्य) के विरुद्ध अब तक अवैध वसूली की धारा 384 ipc के तहत अपराध दर्ज नही किया जाना एक ही कानून व्यवस्था का दो तरीकों से इस्तेमाल किए जाने का प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिले के जिम्मेदार अधिकारी ऐसा क्यों कर रहे है यह समझ से परे है.?

अब तक हुई सिर्फ खाना पूर्ति की कारवाही..

आपने भी पढ़ा,देखा,सुना होगा कि कानून सबके लिए एक समान है। इसके बावजूद वारे क्लिनिक संचलक से डरा धमका कर तीन लाख रु की अवैध उगाही मामले में सिर्फ इंचार्ज थाना प्रभारी कमल किशोर पटेल को रायगढ़ जिले के सवेंदनशील पुलिस अधीक्षक सन्तोष कुमार सिंह ने तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच अंततः निलंबित कर दिया है। यही नही ततपश्चात पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच डीएसपी गरिमा द्विवेदी को सौप दिया है। ख़बर है कि मामले में जांच अभी जारी है। जबकि घटना से जुड़े शेष पुलिस कर्मियों और स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के अधिकारी बी एम ओ सिदार तथा तहसीलदार सुनील अग्रवाल पर अब तक प्रशासन और पुलिस ने यथोचित कारवाही नही की गई है। इन दो अधिकारियों को सिर्फ शो काज नोटिस देकर अगले 25 दिवस के भीतर जवाब मांगा गया है,जो अपराध की गम्भीरता के लिहाज से नाकाफी है।।

जबकि पीड़ित शिकायतकर्ता डाक्टर वारे ने पुलिस और प्रशासन को दी अपनी लिखित शिकायत में स्पष्ट रूप से इस्पेक्टर कमल किशोर पटेल व अन्य का नाम लिखा है।

इसके बावजूद उनसे भयादोहन कर अवैध उगाही करने की घटना में शामिल लोगों के विरुद्ध ipc की धारा 384 के तहत थाने में अपराध का दर्ज नही होना दिखाता है कि संविधान ने देश के सभी नागरिकों एक समान कानूनी अधिकार भले ही दिए हो पर कानून को अमल में लाने वाली संस्थाए और अधिकारियों ने संवैधानिक अधिकारों और नियमों को मजाक बना कर रख दिया है। इधर जानकारियाँ मिल रही है कि प्रकरण से जुड़ी जांच की कछुवा गति का फायदा उठाने में लगे तमाम प्रभावशाली दोषी अधिकारियों ने अब अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले से जुड़ी खबरें चलाने वाले क्षेत्र के कुछ सक्रिय पत्रकारों को फंसाने की जुगत लगाने में लगे हैं।। जिसे लेकर पत्रकारों में भय का माहौल है।।

Related Articles

Back to top button
close button