world

जापान: जेल में निसान के पूर्व चेयरमेन को हफ्ते में सिर्फ दो बार नहाने की इजाजत



निसान कंपनी के पूर्व चेयरमेन कार्लोस घोन को जेल में दी जा रही प्रताड़ना पर उनकी वाइफ कैरोल घोन ने मानवाधिकार संस्था को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में जापान की आपराधिक न्याय व्यवस्था को अनुचित और कठोर बताते हुए इसकी आलोचना की है.

मानवाधिकार आयोग की टोक्यो स्थित शाखा को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, ‘मेरे पति के साथ हो रहा व्यवहार यह बताता है कि असल में बेरहम व्यवस्था क्या होती है. कार्लोस घोन 19 नवंबर को गिरफ्तार किए गए थे. उनपर आमदनी कम कर के बताने, निजी निवेश के जरिए निसान मोटर कंपनी को नुकसान पहुंचाने और सऊदी कारोबारी को धोखा देने का आरोप है.

दो दशकों तक निसान कंपनी का नेतृत्व करने वाले और जापानी वाहन निर्माता को दिवालियापन से बचाने वाले घोसन ने पिछले सप्ताह टोक्यो की एक अदालत में अपनी बेगुनाही का दावा किया था. गिरफ्तारी के बाद यह पहली बार था जब वह सार्वजनिक तौर पर देखे गए.

पत्र के बाद मानवाधिकार समूहों के निशाने पर आया जापान

कैरोल घोसन ने पत्र में बताया कि किस तरह अभियोजन पक्ष कैदियों से बिना वकील की मौजूदगी में कबूलनामें के लिए पूछताछ करता है. उनके मुताबिक जापान में संदिग्धों के लिए ऐसी स्थितियां आम हो गई है. इस पत्र के सामने आने के बाद जापान की प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के निशाने पर आ गई है.

पत्र के मुताबिक उनके पति का एक सप्ताह में करीब तीन किलो वजन कम हो गया है. उन्होंने लिखा कि कार्लोस को जेल में दवाईयां भी नहीं दी जाती, साथ ही उन्होंने पत्र में लिखा कि जेल में एक सप्ताह में सिर्फ दो या तीन बार ही नहाने की इजाजत है.

कौरोल ने पत्र में लिखा, ‘किसी भी इंसान को सिर्फ कबूलनामे के लिए ऐसी परिस्थितियों में हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए. इस पत्र में उन कैदियों का भी जिक्र है जिनके साथ जेल में ऐसा बुरा बर्ताव हुआ और बाद में वे बेकसूर साबित हुए. मानवाधिकार संस्था के जापान की निदेशक कैनेई डोई को यह पत्र लिखा गया है. हालांकि कैनेई ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

Live Share Market

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES