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पहली बार KGMU में इंजिनियर की मदद से हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

जीशान हुसैन राईनी, लखनऊ
एक इंजिनियर की मदद से लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी। सुनने में अटपटा भले ही लगे लेकिन केजीएमयू में ऐसा ही हुआ है। शनिवार को लिवर ट्रांसप्लांट के दौरान ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टर के साथ एक इंजिनियर भी मौजूद रहा। लिवर कहां से काटना है, कितना अंदर काटना है इसकी पूरी प्लानिंग में डॉक्टरों के साथ ही इंजिनियर भी शामिल रहा। सफल ट्रांसप्लांट के साथ ही केजीएमयू ने इंटरडिसिप्लिनरी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

3डी प्रिंटर तकनीक से इंजिनियर प्रदीप कुमार यादव ने डोनर के लिवर के बराबर वर्चुअल लिवर तैयार करने के बाद मॉडल प्रिंट किया। इसके बाद मॉडल को ओटी में ले जाकर डॉक्टरों ने डोनर के लिवर पर रखा और उसी के मुताबिक काटा। पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

3डी जेम्स लैब
केजीएमयू डेंटल फैकल्टी की डॉ. दिव्या मेहरोत्रा द्वारा तैयार 3डी जेम्स लैब में इंजीनियर प्रदीप कुमार यादव ने लिवर का डिजाइन के साथ प्रिंट तैयार किया। डॉ. दिव्या ने बताया कि डोनर का लिवर काटकर मरीज में लगाते हैं। इसमें ध्यान रखना होता है कि लिवर काटते समय डोनर के लिवर की दूसरे हिस्सों को नुकसान न पहुंचे। थ्रीडी प्रिंटर में पहले एमआरआई की मदद से वर्चुअल लिवर तैयार किया जाता है। इसके बाद देखा जाता है कि कहां-कहां दूसरी नर्व है। इसके बाद तय करते हैं कि कहां से कट लगाना है। इससे खतरा काफी कम हो जाता है। ट्रांसप्लांट में शामिल इंजीनियर प्रदीप ने बताया कि जबड़े की सर्जरी के दौरान ओटी में गया था। हालांकि लिवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर सर्जरी के दौरान पहली बार डॉक्टरों की टीम के साथ ओटी में गया। लिवर में हेप्टिक वेंस नहीं दिखती है। ऐसे में डॉक्टरों के कहने के मुताबिक दो मॉडल तैयार किये। एक ऊपर से कट करने और दूसरा अंदर नर्व कहां-कहां है इसके आधार पर। ऊपर का हिस्सा तो लिवर के ऊपर रखकर डॉक्टरों ने काटा था। फिर हेप्टिक वेन कितनी दूरी पर है यह हमारे दूसरे मॉडल में देखकर पता कर लिया।

यूके का कॉन्सेप्ट लागू किया
डॉ. दिव्या ने बताया कि 3डी प्रिंटर लैब के लिए यूके में अध्ययन किया। वहां 3डी प्रिंटर में मॉडल इंजिनियर तैयार करते हैं और ओटी में डॉक्टरों के साथ भी जाते हैं। इसी के आधार पर यहां व्यवस्था की गई। पहले जबड़े की सर्जरी का मॉडल बनवाया और इंजिनियर को ओटी को साथ में रखा। इसके बाद लिवर की सर्जरी में भी मॉडल तैयार करने के साथ ही हमारा इंजिनियर ओटी में गया।

पांच मरीजों का होगा लिवर ट्रांसप्लांट
केजीएयमू में लिवर ट्रांसप्लांट फिर शुरू हो गया है। एक मरीज का शनिवार को ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। पांच अन्य मरीजों को जल्द ट्रासंप्लांट होगा। कोरोना संक्रमण के कारण केजीएमयू में लंबे अरसे से लिवर ट्रांसप्लांट बंद था। पीजीआई समेत प्रदेश के दूसरे सरकारी संस्थानों में सुविधा नहीं है। ऐसे में केवल निजी संस्थानों में ही लिवर ट्रांसप्लांट हो रहे हैं। लखनऊ में केजीएमयू के अलावा अपोलो अस्पताल में यह सुविधा है। दिल्ली के कई संस्थानों में ट्रांसप्लांट हो रहे हैं। जहां 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं, केजीएमयू में आधे खर्च में ट्रांसप्लांट हो रहा है।

पीजीआई में भी तैयारी
पीजीआई में भी लिवर ट्रांसप्लांट दोबारा शुरू करने की घोषणा की गई थी। निदेशक प्रो. आरके धीमन ने टीम गठित की थी, जिसकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। ओपीडी शुरू होने के बाद एक बार फिर ट्रांसप्लांट की तैयारी चल रही है।

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