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फेलोशिप के नाम पर धर्मांतरण करने वालों छात्रों को विदेश से मिलते थे 50 हजार

लखनऊ/नोएडा
यूपी एटीएस ने जिस धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश किया है, उसकी अब फंडिंग की जांच भी शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो नोएडा डेफ सोसायटी-117 के जिन छात्रों का धर्मांतरण करवाया गया, उनके अकाउंट में विदेश से रकम आई थी। पूछने पर छात्रों को यह बताया गया था कि यह उनकी पढ़ाई के लिए एक संगठन की तरफ से फेलोशिप दी गई है।

यह रकम 10 हजार से लेकर 50 हजार तक बताई जा रही है। हरेक धर्मांतरण पर गिरफ्तार आरोपियों को भी विदेश से रकम मिलती थी। अब छात्रवृत्ति और फेलोशिप से जुड़े बिंदुओं पर भी जांच हो रही है। फरार चल रहे सोसायटी के एक पूर्व शिक्षक के अकाउंट की जानकारी अहम होगी। दो पुलिसकर्मियों को नोएडा डेफ सोसायटी की बिल्डिंग के पास तैनात किया गया है।

महिलाओं के भी रैकेट में शामिल होने की आशंका
अब तक की जांच में सामने आया है कि धर्मांतरण के हरेक मामले में विदेश से फंडिंग हुई है। आरोपियों को भी हर एक केस में पैसा मिला है। इस लालच में आरोपियों ने ज्यादा से ज्यादा धर्म परिवर्तन पर जोर दिया। अपने रैकेट में लालच देकर और लोगों को भी शामिल कर लिया। कुछ महिलाओं का भी धर्मांतरण के इस रैकेट में शामिल होना बताया जा रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में कई जगह छापेमारीइस रैकेट में लखनऊ से गिरफ्तार दोनों आरोपी उमर गौतम और मौलाना जहांगीर को एटीएस ने दो दिन का रिमांड लिया था। पूछताछ के दौरान एटीएस की टीमों ने नोएडा, गाजियाबाद, कैराना, दिल्ली और गुड़गांव में छापेमारी की।

गुड़गांव में मानेसर के एक होटल में एक समारोह के आयोजन की भी बात सामने आई। होटल बुकिंग की जानकारी और आयोजकों की तलाश हो रही है। सीसीटीवी फुटेज पर भी एटीएस की जांच का हिस्सा है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों का भी सहयोग लेंगेअपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने एटीएस के इस खुलासे को बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने कहा कि आगे की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का भी सहयोग लिया जाएगा। एटीएस की जांच में कई इंटरनैशनल तथ्य भी सामने आए हैं।

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