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मुंबई में कोरोना वायरस नहीं 'नमकीन पानी' का लगा था टीका! अब तक 10 अरेस्ट

मुंबई/कोलकाता
मुंबई में फर्जी कोविड टीकाकरण का शिकार हुए लोगों को सलाइन वॉटर का इंजेक्शन दिया गया था। जांच में यह हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। कई जगहों पर फर्जी कोविड-19 टीकाकरण कैंप चलाने वाले गिरोह की जांच के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं कोलकाता में फर्जी वैक्सीनेशन ड्राइव के शिकार लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें की हैं।

अधिकारी ने बताया कि पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि इन शिविरों में कोविड-19 टीके के नाम पर ‘सलाइन वॉटर’ (नमकीन पानी) का इंजेक्शन दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि टीकाकरण शुल्क के नाम पर लोगों से वसूले गए कुल 12.40 लाख रुपये और एक कार बरामद की गई थी। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा, ‘शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपियों ने सलाइन वॉटर का इंजेक्शन दिया था। कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि शिविर में प्रयोग की जाने वाली शीशियों की सील टूटी हुई थी। आरोपियों ने इन शिविरों में लोगों को जिस खतरे में डाला, उसके मद्देनजर कई धाराओं समेत, धारा 308 में मामला दर्ज किया गया है।’ पाटिल ने कहा कि मुंबई में 25 मई और छह जून के बीच ऐसे नौ शिविर लगाए गए थे। इसके संबंध में विभिन्न पुलिस थानों में सात मामले दर्ज किए गए हैं।

कोलकाता में भी टीका लगाने वाले चिंता में
कोलकाता के कस्बा इलाके में दस दिन चले फर्जी वैक्सीनेशन कैंप में टीका लगाने वाले लोग अब टेंशन में हैं। सिक्यॉरिटी गार्ड कौशिक दास को टीका लगने के दस दिन बाद भी बांह में दर्द है, वहीं गृहिणी मौसमी पाल को बराबर सिरदर्द हो रहा है। यह कैंप देबंजन देब ने लगाया था जिसे पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इसी कैंप में टीएमसी सांसद और बंगाली ऐक्ट्रेस मिमी चक्रवर्ती ने भी टीका लगवाया था। आरोपी देबंजन ने लोगों को स्पूतनिक की डोज लगाने की बात कही थी। हालांकि यह फ्रॉड सामने आने के बाद अब लोग इस चिंता में हैं कि उन्हें आखिर लगाया क्या गया था। पुलिस का कहना है कि देबंजन मानसिक रूप से अस्थिर लगता है।

फर्जी वैक्सीन केस के लिए SIT बनी
फर्जी वैक्सीन केस की जांच के लिए मुंबई पुलिस ने डीसीपी रैंक के अधिकारी विशाल ठाकुर के नेतृत्व में एक एसआईटी बनाई है। इस केस में शुक्रवार को चारकोप के एक अस्पताल के दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। बीएमसी ने भी अब सोसायटियों में टीकाकरण करने से पहले प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर को वॉर्ड के मेडिकल अफसरों को जानकारी देना अनिवार्य किया है।

जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने एक प्राइवेट अस्पताल से वैक्सीन की 38 शीशियां खरीदीं। गिरोह के कुछ लोगों ने काफी खाली शीशियां एक दवा कंपनी के जरिए भी मैनेज कीं। वैक्सीन की खाली शीशियों में डिस्टिल वॉटर भरकर फर्जी टीका लगाया गया। यह टीका लगाने वालों को कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ।

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