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स्क्रीन टाइम बढ़ने से जाने लगी आंखों की रोशनी, 20-20 का फॉर्म्यूला अपनाकर बचें इस समस्या से

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
कोरोना महामारी में लोग घरों में सिमट गए हैं। बड़ों को अपने ऑफिस का काम घर से जारी रखना पड़ रहा है तो बच्चों की क्लास भी ऑनलाइन ही चल रही हैं। एक सर्वे के मुताबिक इस वजह से इन दिनों भारत में 23 पर्सेंट लोगों की आंखों में कमजोरी और दिखाई देना कम पड़ने जैसे लक्षण आ रहे हैं। इसकी वजह बढ़ता है। चाहे मोबाइल पर हो या कंप्यूटर पर। डॉक्टरों का कहना है कि हमें अपनी इस आदत को बदलना होगा, नहीं तो यह समस्या दिनों दिन बढ़ती चली जाएगी और लोग मायोपिया जैसी समस्या के शिकार होते जाएंगे।

सेंटर फॅार साइट के डायरेक्टर डॉ. महिपाल सचदेव ने कहा कि स्टडी से यह साफ हो चुका है कि ऑनलाइन क्लास हो या ऑफिस का काम इसकी वजह से आई स्ट्रेन, चश्मे का नंबर बढ़ना आदि की समस्या हो रही है। इन दिनों स्कूली बच्चे में मायोपिया यानी चश्मे के माइनस नंबर लग रहे हैं। इसमें बच्चे की दूर की निगाह धुंधली हो जाती है, चूंकि बच्चे अभी बाहर नहीं निकल रहे हैं तो उन्हें इसका पता भी नहीं चल पाता है। इसलिए यहां पर पैरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों की परेशानी पर गौर करें। अगर ऐसी दिक्कत है तो तुरंत इलाज कराएं, क्योंकि इलाज में देरी की वजह से बीमारी बढ़ सकती है। समय पर इलाज कराने से माइनस का नंबर बढ़ने पर चश्मा बदल कर परेशानी दूर हो सकती है।

डॉक्टर महिपाल ने कहा कि इसके अलावा इन दिनों कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी देखा जा रहा है। इसमें बड़े लोग भी शामिल हैं। खासकर जो लोग दिन भर कंप्यूटर पर काम करते हैं उन्हें यह दिक्कत हो रही है। इसमें आंखों के पीछे दर्द होता है, सर में दर्द होता है, आंखें ड्राई हो जाती है। ऐसी समस्या से गुजर रहे लोगों को सबसे पहले 20-20 का फॉर्म्यूला अपनाना चाहिए। इसमें 20 मिनट तक लगातार काम के बाद 20 सेकेंड के लिए ब्रेक लें और 20 मीटर दूरी की तरफ देंखें और 20 बार आंखें झपकाए। इससे आंखों को रिलैक्स मिलता है। इसके अलावा ड्राइ आई के लिए ड्रॉप इस्तेमाल कर सकते हैं।

डॉक्टर महिपाल ने कहा कि कंप्यूटर विजन सिंड्रोम में आखों के नस पर एक प्रकार का दबाव पड़ता है। इसकी वजह से फोकस करने में दिक्कत होती है। यह ऐसी समस्या है जिसका इलाज संभव है। जरूरी है कि आप समय पर इलाज के लिए आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करें और डॉक्टर के अनुसार इलाज कराएं। अपने मन से बिना वजह आई ड्राप का सेवन नहीं करें। डॉक्टर ने कहा कि अभी जो हालात है, चाहे बच्चे हों या बड़ें, सभी का अधिकांश समय ऑनलाइन बीत रहा है। चूंकि बच्चों का स्कूल ऑनलाइन है और बड़ों का काम भी। ऐसे में इसमें बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है। आंखों को हेल्दी रखें, बैलेंस डाइट लें। लगातार काम न करें। बीच बीच में ब्रेक लें। इसी प्रकार कोशिश करें कि बच्चों का भी स्क्रीन टाइम कम हो। ऑनलाइन क्लास के अलावा बच्चे मोबाइल या लैपटॉप पर कम समय बिताएं, पैरेंट्स को इसके लिए समय देना होगा और सभी के लिए रुटीन तय करनी होगी कि कितना समय स्क्रीन टाइम दें। इसका सही से पालन करें और दिक्कत होने पर समय पर इलाज लें तो बहुत हद तक स्थिति बैलेंस बनाए रखा जा सकता है।

मेरी बहन की उम्र 58 साल है। 45 दिन पहले कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। डॉक्टर से दवाई लेने के बाद फीवर 8-10 दिन बाद ठीक हो गया। अभी 10 दिन पहले मेरी सिस्टर को बाईं आंख से कम दिखाई देने लगा। आंख के डॉक्टर कह रहे हैं कि बीपी ज्यादा होने के कारण नस में सूजन आ गई है। अब हमें क्या करना चाहिए?
कोरोना में ब्लड प्रेशर बढ़ना और थ्रम्बोसिस की समस्या देखी गई है। आंखों में भी इसका असर हो सकता है। इसके लिए स्पेशल टेस्ट और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसलिए, आप रेटिना स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मिलें और इलाज कराएं। इसका इलाज हो सकता है, इसमें स्पेशल टेस्ट के साथ स्पेशल इलाज के तौर पर खास इंजेक्शन की जरूरत होती है।

मेरा नाम बलवंत है और मैं कालकाजी में रहता हूं। मुझे दो ढाई सालों से ड्राई आई की प्रॉब्लम है। मैं तीन अलग-अलग जगह हॉस्पिटल में गया लेकिन मुझे कोई रिलीफ नहीं मिला। प्लीज मुझे इसका सलूशन बताएं।
ड्राई आई की समस्या एक क्रॉनिक प्राब्लम्स है। आंखों की कई बीमारी है जो एक बार हो जाए तो जड़ से फिर खत्म नहीं होती है। आपके मामले में ड्राई आई की एक खास जांच ओएसए करनी होगी। जिसके आधार पर यह पता चल सके कि किस प्रकार की ड्राई आई की समस्या है। इसके बाद ही इलाज संभव है। इसमें लेजर विधि से ड्राई आई का इलाज करना पड़ सकता है। इसलिए आप आंखों के अच्छे सेंटर में जाकर इलाज कराएं, आपकी बीमारी का निदान हो सकता है।

मेरी दाईं आंख से दिखना बंद हो गया है। मैं अब तक तीन बार डॉक्टर को दिखा चुकी हूं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। डॉक्टर ने कहा कि आपको पहले आना चाहिए था। अब क्या करूं?
आपके सवाल से यह साफ नहीं हो रहा है कि आपको किसी प्रकार की बीमारी है। यह सच है कि आंखों की कई बीमारी ऐसी है जिसमें नस सूख जाए या पर्दा खराब हो जाए या फिर ग्लूकोमा हो जाए तो यह फिर से ठीक नहीं होता है। आज की तारीख में भी कई बीमारी लाइलाज है। इसलिए आप पहले डॉक्टर से मिलें, जांच कराएं और उसके बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचे।

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