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एफडीए का दावा- हमारी मदद से जब्त हुईं नकली दवाएं, पुलिस बोली- छापेमारी में प्रोटोकॉल के तहत बुलाया

लखनऊ/कानपुर
लखनऊ के अमीनाबाद में लंबे अरसे से चल रहा था, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि अनुभाग (एफडीए) खामोश बैठा रहा। कानपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को अमीनाबाद में दो गोदामों में छापा मारकर करीब 2 करोड़ की नकली दवाएं बरामद कीं।

कानपुर पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई पुलिस के स्तर पर हुई। छापे के दौरान सूचना देने पर अमीनाबाद पुलिस ने एफडीए अफसरों को प्रोटोकॉल के तहत मौके पर बुलाया था। इसके उलट एफडीए का दावा है कि उन्हें पहले से नकली दवाओं के गोरखधंधे की जानकारी थी और कार्रवाई में एफडीए भी शामिल थी।

कौन सच्चा-कौन झूठा

1. कार्रवाई में शामिल थे
लखनऊ एफडीए का दावा है कि मंगलवार को हुई कार्रवाई में एफडीए भी शामिल था, जबकि कानपुर पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई पुलिस के स्तर पर हुई। कानपुर पुलिस ने मंगलवार को ही यह जानकारी सार्वजनिक कर दी थी, लेकिन एफडीए के अफसरों ने ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की।

2. बाजार में नहीं पहुंची दवा
एफडीए अफसरों का कहना है कि नकली दवा के कंसाइनमेंट का पहले से पता था। इसे स्टोर में ही जब्त कर लिया गया। इस कारण बाजार में नकली दवा पहुंची ही नहीं। वहीं, कानपुर पुलिस का कहना है कि नकली दवाओं की बिक्री के खुलासे के बाद इसकी जांच शुरू की गई, तब गोदामों का पता चला।

3. डेढ़ महीने से कर रहे थे जांच
ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि नकली दवाओं के मामले में डेढ़ महीने से जांच हो रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर यह पता किया जा रहा था कि नकली दवाएं कहां से आ रही हैं, लेकिन डेढ़ महीने में एफडीए की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अफसर एफडीए स्तर पर हुई किसी कार्रवाई का ब्योरा तक नहीं दे सके।

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