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दूसरी लहर में ही आ चुका था डेल्टा प्लस, लक्षण भी डेल्टा से अलग नहीं

नई दिल्ली

क्या है डेल्टा प्लस
कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट बेहद संक्रामक डेल्टा वैरिएंट का ही बदला हुआ रूप है। भारत में दूसरी लहर के लिए डेल्टा ही जिम्मेदार माना जाता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट (B.1.617.2.1) डेल्टा वेरिएंट (B.1.617.2) में ही आए बदलाव से बना है। डेल्टा वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में आए एक बदलाव (म्यूटेशन) के कारण डेल्टा प्लस बना। स्पाइक प्रोटीन से ही वायरस शरीर में फैलता है। डेल्टा प्लस के स्पाइक प्रोटीन में जो बदलाव देखा गया है वही बदलाव साउथ अफ्रीका में सबसे पहले पाए गए बीटा वैरिएंट में भी देखा गया है।

कितना खतरनाक है
इससे बीमारी के और भी घातक बनने का कोई संकेत अभी तक नहीं मिला। माना जा रहा है कि मौजूदा वक्त में कोरोना मरीजों पर जो मोनोक्लोनल ऐंटीबॉडीज कॉकटेल का इस्तेमाल हो रहा है, डेल्टा प्लस पर उनका भी असर नहीं होता। वैज्ञानिक इसकी गंभीरता को लेकर अभी पड़ताल कर ही रहे हैं। इसे सरकार ने वैरिएंट ऑफ कंसर्न माना है जो ऐसे वायरस को कहा जाता है जो फैल रहा हो और चिंता का सबब हो।

क्या लक्षण होते हैं
भारत में डेल्टा प्लस के 40 मामले ही अब तक नजर में आए हैं। संक्रमित लोगों में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिखे जो डेल्टा से अलग तरह के हों। डेल्टा में पेटदर्द, जी मिचलाना, उलटी, भूख न लगना, सुनने की क्षमता कम होना, जोड़ों में दर्द जैसी दिक्कतें देखी गई हैं।

दुनिया में कहां-कहां मिला
इसका शुरुआती मामला यूरोप में मार्च के आखिर में पाया गया था। दुनिया भर में डेल्टा प्लस के सौ से भी कम मामले सामने आए हैं। 40 भारत में जबकि कनाडा, जर्मनी, रूस में एक-एक, नेपाल में दो, स्विट्जरलैंड में चार, पोलैंड में नौ, पुर्तगाल में 12, जापान में 13 और यूएस में 14 सामने आ चुके हैं।

भारत में कहां-कहां
7 जून तक भारत में जहां डेल्टा प्लस के महज सात ज्ञात मामले थे, वहीं 23 जून तक 40 हो चुके थे। इनमें से 20 से ज्यादा अकेले महाराष्ट्र में मिले हैं। वहीं बाकी मामले केरल और मध्य प्रदेश में हैं।

दूसरी लहर में भी था?
भारत सरकार ने बुधवार को साफ किया कि पुराने सैंपलों की जांच में पता लगा है कि डेल्टा प्लस दूसरी लहर के दौरान ही भारत में कुछ राज्यों में आ चुका था। डेल्टा प्लस 5 अप्रैल को लिए गए एक सैंपल में भी मिल चुका है। ऐसे में सरकार के मुताबिक, यह भारत में नया नहीं है बल्कि बीते दो महीनों से कुछ राज्यों में मौजूद है।

तीसरी लहर की वजह तो नहीं बनेगा?
अभी तक सरकार इस संभावना पर कुछ नहीं बोली है वहीं एक्सपर्ट अलग-अलग राय दे रहे हैं। जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉ टी जेकब जॉन कहते हैं, देश में तब तक तीसरी लहर नहीं आएगी, जब तक कि कोरोना का नया वैरिएंट सामने नहीं आता। मौजूदा वैरिएंट नई लहर को जन्म नहीं दे सकता। डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट एक जैसे ही हैं, बस थोड़ा सा फर्क है।

टीका कितना असरदार
भारत सरकार का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट पर भारत में उपलब्ध कोविशील्ड और कोवैक्सिन दोनों असरदार हैं। हालांकि विदेश में हुई कुछ स्टडी में कहा गया है कि वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ बाकी वैरिएंट की तुलना में कुछ कम ऐंटीबॉडी बनाती हैं। ब्रिटेन में दो ऐसे लोगों में डेल्टा प्लस का संक्रमण मिला जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लिए हुए 14 दिन से ज्यादा बीत चुके थे।

तीसरी लहर आएगी इससे?
जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉ टी जेकब जॉन कहते हैं, देश में तब तक तीसरी लहर नहीं आएगी, जब तक कि कोरोना का नया वैरिएंट सामने नहीं आता। मौजूदा वैरिएंट नई लहर को जन्म नहीं दे सकता। वह कहते हैं, डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट एक जैसे ही हैं, बस थोड़ा सा फर्क है।

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