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क्‍या महा अघाड़ी गठबंधन तोड़ने के मूड में है कांग्रेस? महाराष्‍ट्र में आखिर क्‍यों उठ रहा यह सवाल

मुंबई पिछले कुछ समय से महाराष्‍ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार में फूट की खबरें लगातार सुर्खियां बनी हुई हैं। महाराष्‍ट्र कांग्रेस के अध्‍यक्ष नाना पटोले के एक बयान से इन अफवाहों को और हवा मिल गई है। बात इतनी ज्‍यादा बढ़ गई कि वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री पृथ्‍वीराज चव्‍हाण को सामने आकर सफाई देनी पड़ी है। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया है कि महा विकास अघाड़ी सरकार अपने पांच साल पूरे करेगी। कांग्रेस का इरादा तीन पार्टियों के इस गठबंधन को तोड़ने का नहीं है।

दरअसल दो दिन पहले नाना पटोले ने कहा था कि 2024 का विधानसभा और लोकसभा चुनाव कांग्रेस अपने दम पर लड़ेगी। पटोले ने कहा कि अगर शिवसेना बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाती है तो कांग्रेस सरकार का हिस्‍सा नहीं रहेगी और आलाकमान इस पर फैसला लेगा। हालांकि, उन्‍होंने यह भी कहा कि ऐसा होने के आसान बिलकुल नहीं हैं।


सीएम ठाकरे ने जताई थी नाराजगी

मुंबई कांग्रेस के अध्‍यक्ष भाई जगताप ने भी पटोले की सुर में सुर मिलाए थे। पटोले मुख्‍यमंत्री बनने की इच्‍छा भी जता चुके हैं। उनके इन बयानों को लेकर शिवसेना चीफ और मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों नाराजगी जताई थी। शिवसेना के स्‍थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ठाकरे ने अप्रत्‍यक्ष रूप से कांग्रेस पर हमला बोला था।


‘कांग्रेस अपने दम पर लड़ेगी, यह कहने में बुराई नहीं’

नाना पटोले के बयान पर उठे विवाद को शांत करने के लिए पृथ्‍वीराज चव्‍हाण आगे आए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी के साथ मिलकर यह गठबंधन इसलिए बनाया था ताकि बीजेपी को महाराष्‍ट्र की सत्‍ता से दूर रखा जा सके। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से समर्थन वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। कांग्रेस की ओर से अघाड़ी गठबंधन को कमजोर करने के दावे को नकारते हुए चव्‍हाण कहते हैं कि ऐसा कहने में कुछ भी गलत नहीं है कि कांग्रेस आगे के चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। अगर हम यह कहते हैं कि हम केवल 288 में से सिर्फ 80 सीटों (एक तिहाई) पर चुनाव लड़ेंगे तो हमारे नेता और कार्यकर्ता दूसरी सीटों पर काम करने के लिए उत्‍साहित नहीं रहेंगे।

‘पटोले के बयान को गंभीरता से न लें उद्धव’
पृथ्‍वीराज चव्‍हाण ने कहा कि मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे को नाना पटोले के बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। पटोले का मकसद सिर्फ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनावों में जमकर काम करने के लिए उत्‍साहित करने का था। उनके बयान को दूसरे अर्थों में नहीं लेना चाहिए। वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक, तीन दलों के गठबंधन का यह फैसला कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने लिया था। इसलिए गठबंधन में कांग्रेस रहेगी या नहीं, इस पर शीर्ष नेता ही फैसला लेंगे। मुंबई से इस पर कोई फैसला नहीं होगा।

मोदी और ठाकरे की मुलाकात से ‘सुलगा’ धुआं
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले नई दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच मुलाकात हुई थी। इस बैठक के बाद ही महाराष्‍ट्र की राजनीति में उठापटक की अटकलें लगाई जा रही हैं। शिवसेना और एनसीपी की तरफ से इसको लेकर कई बार स्‍पष्‍टीकरण दिया जा चुका है। शिवसेना का कहना है कि नरेंद्र मोदी पूरे देश के पीएम हैं न कि एक पार्टी के। ऐसे में उनसे मुलाकात करने के गलत मायने नहीं निकाले जाने चाहिए।

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