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घर-घर राशन स्कीम पर बीजेपी का आरोप- राशन माफिया के नियंत्रण में है दिल्ली सरकार, रविशंकर प्रसाद ने केजरीवाल से पूछे सवाल

नई दिल्लीदिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्रीय कानून मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि घर-घर राशन योजना के पीछे दिल्ली सरकार की मंशा घोटाले को बढ़ावा देने की है, ना कि आमजन को सुविधा पहुंचाने की। उन्होंने खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए यह भी दावा किया कि यह योजना कानूनी तौर पर भी अमान्य है। प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दिल्ली के मुख्यमंत्री से कई सवाल भी पूछे।

प्रसाद के जवाब में उतरे सिसोदिया
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के आरोपों पर अपने जवाब में कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ गाली-गलौच करती है। वहीं, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “ऑक्सीजन, राशन, परीक्षा या वैक्सीन का मसला हो, सभी में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है। अरविंद केजरीवाल ने गरीब लोगों का राशन घर पहुंचाने की बात कही थी तो आज केंद्रीय मंत्री आकर गाली-गुफ्तार करने लगे।” ध्यान रहे कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकारी की घर-घर राशन योजना पर रोक लगा दी है।

होम डिलिवरी स्कीम के पीछे बड़ा घोटाला: बीजेपी
इससे पहले प्रसाद ने कहा, “होम डिलीवरी देखने में अच्छा लगता है, लेकिन थोड़ा इसके अंदर जाएं तो स्कैम के कितने गोते लगेंगे, पता नहीं।” उन्होंने कहा कि राशन कार्ड लेकर दुकान पर जाते हैं, तो उसके ऑडिट की पूरी प्रक्रिया है। कितना माल है, कितना गया, उसका पूरा ऑडिट होता है। अगर आप उठाकर घर जाएंगे तो कहां का माल कहां जा रहा है, कुछ पता नहीं चलेगा। देश में ऐसा कहीं नहीं हो रहा है।

दिल्ली सरकार पर सवालों की बौछार
बीजेपी नेता ने कहा कि आंध्र प्रदेश में एक ऐसी योजना चली थी, लेकिन बाकी देश में ऐसा कहीं नहीं है। प्रसाद ने दिल्ली सरकार से पूछा कि राशन जब पीडीएस दुकानों से उठाकर घर-घर पहुंचाया जाएगा तो कुछ हिस्सा रास्ते से गायब नहीं हो जाए इसका हिसाब कैसे रखा जाएगा? उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के पास अनाज तो है नहीं तो फिर योजना कैसे चलेगी?

उन्होंने कहा, “आपको हर महीने 1,163 करोड़ का अनाज जाता है, क्या आप उसी पर सारा खेल खेलेंगे? उस पर खेल खेलेंगे तो खाद्य सुरक्षा कानून रास्ते में आएगा। क्या हम इसके प्रावधानों का उल्लंघन करें? आप खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दिया गया अनाज बाहर ले जाएंगे तो उसकी प्रामाणिकता, उसकी पारदर्शिता और उसकी जवाबदेही कैसे साबित होगी? दिल्ली में दलित परिवारों के कितने लोगों को राशन का लाभ मिलता है? आपके पास आंकड़े भी नहीं है।”

पॉश मशीनें नहीं लगाने पर गंभीर आरोप
बीजेपी नेता ने दावा किया कि दिल्ली में चार महीने के लिए राशन दुकानों पर चार महीने के लिए ही पॉश मशीनों ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया चली थी और चार लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़ लिए गए थे। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब 85% राशन कार्ड पॉश मशीन से लिंक हो गए हैं। कई राज्यों में तो 90 से 95 प्रतिशत तक लिंकेज है। दिल्ली में जनवरी 2018 में राशन दुकानों पर ई-ऑथेंटिकेशन का काम शुरू हुआ और अप्रैल में इसे रोक दिया गया। इस चार महीने में चार लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए।


राशन माफिया दिल्ली सरकार पर हावी: रविशंकर प्रसाद

प्रसाद ने कहा कि राशन माफिया दिल्ली सरकार पर हावी हो गया है। उनके मुताबिक, दिल्ली सरकार ने तर्क दिया कि टेक्नॉलजी काम नहीं करती है। बीजेपी नेता ने पूछा, “फिर सवाल उठता है कि आखिर चार महीने तक आपने ई-ऑथेंटिकेशन कैसे किया?” उन्होंने कहा, “मैं देश का टेक्नॉलजी मिनिस्टर हूं, मुझसे मदद मांग सकते थे। लेकिन बात यह नहीं है। जब मेघालय, मिजोरम जैसे पहाड़ी इलाकों में पॉश टेक्नॉलजी काम कर रही है तो दिल्ली में नहीं करेगी? अगर दिक्कत भी थी तो दो-चार महीने में इसे सुलझा लिया जाता, लेकिन अप्रैल 2018 से आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।”

दिल्ली ने क्यों नहीं लागू किया वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना?
उन्होंने कहा, “देश के 34 प्रदेशों ने अपने यहां वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना को लागू कर दिया है, सिर्फ तीन प्रदेशों ने इसे लागू नहीं किया। एक असम, दूसरा प. बंगाल और तीसरा दिल्ली।” प्रसाद ने बताया कि असम में यह लागू इसलिए नहीं हो पाया कि इसे आधार से जोड़ना पड़ता है और असम में आधार का काम देर से शुरू हुआ था।

उन्होंने कहा, “केजरीवाल जी, आप बताएं कि वन नेशन, वन राशन कार्ड आपने दिल्ली में लागू क्यों नहीं किया? अगर भारत के 34 राज्य लागू कर सकते हैं तो आपको क्या परेशानी है? अगर देश के 28 करोड़ पोर्टेबल ट्रांजैक्शन हो सकते हैं उस पर तो दिल्ली में प्रवासी मजदूरों और गरीबों के हितों की अनदेखी आप क्यों कर रहे हैं? आप अपनी राशन की दुकानों पर ई-पॉश मशीन से ऑथेंटिकेशन कब शुरू करेंगे? आपने 2018 में इसे समाप्त किया और अब तक शुरू नहीं किया है।”

होम डिलिवरी का अनुमति नहीं देता खाद्य सुरक्षा कानून
केंद्रीय कानून मंत्री ने दिल्ली सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि मोहल्ला क्लीनिक दवा तो पहुंचा नहीं सकी, अब अनाज की बात कर रहे हैं। दिल्ली सरकार राशन माफिया के नियंत्रण में है। भारत सरकार सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर सस्ता गेंहू और चावल राज्यों को देती है। 2013 का खाद्य सुरक्षा कानून कहता है कि ये अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन दुकानों के जरिए ही लाभुकों को दिए जा सकते हैं। खाद्य सुरक्षा कानून में राशन दुकानों की परिभाषा तय की गई है। प्रसाद ने कहा खाद्य सुरक्षा कानून के तीन खंडों- खंड 12, खंड 28 और खंड 29 का जिक्र किया और कहा कि बिना राशन दुकान के अनाज बांटने का प्रावधान नहीं हो सकता है।

प्रसाद ने कहा कि दिल्ली सरकार अगर घर-घर राशन योजना को खाद्य सुरक्षा कानून के अनुरूप मानती है तो वो भारत सरकार के पास प्रस्ताव लाए। उन्होंने कहा, “केजरीवाल जी, अगर आपमें हिम्मत है तो अपना नया प्रस्ताव भारत सरकार को भेजिए। भारत सरकार के इस कानून के अंदर प्रावधान है। हम खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे और आपके प्रस्ताव पर खुले मन से विचार करेंगे।”

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