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क्यूआर कोड स्कैन करते या भेजते समय रहें सतर्क, साइबर जालसाज बना सकते हैं शिकार

लखनऊ
क्यूआर कोड स्कैन करते समय या भेजते समय अलर्ट रहें। साइबर जालसाज रुपये भेजने का झांसा देकर आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसा ही कुछ सरोजनीनगर इलाके में रहने वाले रेलवे में मुख्य कार्यालय अधीक्षक सुनील कुमार श्रीवास्तव के साथ हुआ। जालसाज ने उन्हें 6 जून को कॉल की और उनके एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में बात करते हुए रुपये भेजने के नाम पर क्यूआर कोड भेजने फिर पेमेंट एक्सेप्ट करने का झासा देकर 29,500 रुपये का चूना लगा दिया।

पीड़ित के मुताबिक फोन करने वाले ने खुद को उनका अधिकारी बताते हुए लखनऊ में किसी को रुपये देने की बात कही थी। इसके लिए उसे ऑनलाइन रुपये भेजने के लिए गूगल यूपीआई का क्यूआर कोड भेजने के लिए कहा। जालसाज को अपना अधिकारी समझ कर उन्होंने क्यूआर कोड वॉट्सऐप पर भेज दिया। इस पर जालसाज ने झांसा दिया कि रुपये ट्रांसफर नहीं हो पा रहे है, वह पेमेंट एक्सेप्ट कर लें।

पीड़ित के मुताबिक उन्होंने ध्यान नहीं दिया और वॉट्सऐप पर ‘पे’ लिख कर आए मेसेज पर क्लिक करके अपना पिन डाल दिया। पिन डालते ही उनके खाते से तीन बार में 29,500 रुपये निकल गए। इस पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने सरोजनीनगर थाने में 9 जून को रिपोर्ट दर्ज करवाई। सुनील का कहना है कि जालसाज का मोबाइल फोन ऑन है। फोन करने वह धमका रहा है कि उसका कुछ नहीं होगा।

जालसाज के पास आखिर कैसे होती है सारी जानकारी
पीड़ित सुनील के मुताबिक जालसाज ने जिस अधिकारी के रूप में फोन किया था, उनके बारे में उसे सारी जानकारी थी। आखिर जालसाज के पास उनके और अधिकारी के बारे में सारी जानकारी कैसे थी। एसपी साइबर क्राइम का कहना है कि अधिकतर मामलों में साइबर जालसाजों के पास पीड़ित के बारे में कुछ जानकारी होती है। यह जानकारी वह अलग-अलग तरीकों से हासिल करते हैं।

हर महीने क्यूआर कोड से हो रहे 150 फ्रॉड
एसपी साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह के मुताबिक क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 150 से 200 फ्रॉड के केस सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब हम किसी को क्यूआर कोर्ड भेजते हैं, तब हमारे खाते से रुपये निकलने की संभावना न के बराबर होती है। अब जालसाजों ने नया तरीका निकला है। वह रुपये भेजने के लिए किसी व्यक्ति से क्यूआर कोड मंगाते हैं और फिर रुपये न ट्रांसफर होने का झांसा देकर लिंक भेजकर उसका फोन हैक कर खाते से रुपये निकाल लेते हैं।

कई बार तो जालसाज क्यूआर कोड मंगाने के बाद बातों में फंसा कर पेमेंट जनरेट करके पीड़ित को एक अन्य क्यूआर कोर्ड भेज देते हैं और उसे एक्सेप्ट करने को कहकर खाते से रुपये उड़ा देते हैं। एसपी साइबर क्राइम का कहना है कि सुनील कुमार श्रीवास्तव को भी इन्हीं में से किसी एक तरीके से शिकार बनाया गया होगा।

इन बातों को रखें ध्यान

  • पेमेंट ऐप्स या सोशल मीडिया के जरिए कोई क्यूआर कोड भेजता है तो उसे स्कैन न करें।
  • यूपीआई पिन इनपुट करने के लिए किसी अनाधिकृत जगह से या जिसके बारे में आपको न पता हो, कहा जाए तो अलर्ट हो जाएं।
  • विक्रेता हैं तो किसी भी तरह के भुगतान अनुरोध को स्वीकार करने से बचना चाहिए। इसके लिए हमेशा आपको अपना यूपीआई रजिस्टर्ड फोन नंबर या यूपीआई आईडी रुपये भेजने वाले को देना चाहिए।
  • फिशिंग फ्रॉड में जालसाज पीड़ित को एक लिंक भेज कर उस पर क्लिक करने के लिए कहता है। इस पर क्लिक करते ही आपके फोन में मौजूद किसी भी यूपीआई ऐप को सेलेक्ट करने का विकल्प सामने आ जाता है। जैसे ही आप इसकी अनुमति देते हैं। अकाउंट से रुपये कट जाते हैं। इस लिए कोई लिंक या क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचना चाहिए।

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