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वह खत और बस एक झटके में ठाकरे ने छीन ली थी जोशी से CM की कुर्सी

नदीम
कहा जाता है कि नारायण राणे अगर उस रोज भी बाला साहेब ठाकरे के सामने चुप्पी साधे रह जाते, तो शायद मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला टल सकता था। लेकिन राणे के सवाल पूछने की हिम्मत ने उसी वक्त मनोहर जोशी की मुख्यमंत्री पद से विदाई तय कर दी।

महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी को पहली बार सत्ता में आने का मौका वर्ष 1995 के चुनाव से मिला। मनोहर जोशी के लिए अच्छा हुआ कि गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के लिए आखिरकार बाला साहेब ने उनका नाम तय किया था। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मनोहर जोशी ने भी कहा था कि ‘वह अपने को बहुत भाग्यशाली समझते हैं कि साहेब ने उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाने के योग्य समझा।’

तल्‍खी ने बदला बाला साहेब का दिमागसाहेब के ‘आशीर्वाद’ से वह सरकार चलाते गए। करीब चार साल गुजर गए, लेकिन उन्हें यह भनक नहीं लगने पाई कि ‘साहेब’ के दिमाग में अब कुछ और चलने लगा है। शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों में आई तल्खी और मनोहर जोशी के बदलते हुए मिजाज के मद्देनजर बाला साहेब अब अपने कुछ विश्वासपात्र सहयोगियों से सरकार के नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करने लगे थे।

नारायण राणे ने की हिम्‍मत कई मौकों पर वह नारायण राणे से पूछ चुके थे कि अगर जोशी हटा दिए जाएं तो क्या वह राज्य चलाने की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं? और फिर बात टल जाती थी। लेकिन एक रोज उन्होंने राणे को ‘मातोश्री’ बुलाया और वही सवाल किया। राणे में न जाने उस रोज कहां से हिम्मत आ गई। कहते हैं कि उन्होंने बाला साहेब से पूछ लिया, ‘साहेब, यह बात आप कई बार कह चुके हैं, लेकिन आप जोशी को हटाएंगे कब?’

ऐसे हुआ नए सीएम का ऐलान बाला साहेब ने उसी वक्त अपने सहायक को बुलाया और जोशी के लिए एक पत्र डिक्टेट किया, ‘आप राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दें। इस्तीफा सौंपने के बाद ही हमसे मिलने के लिए आएं।’ इसके अगले दिन बाला साहेब ने पार्टी विधायकों की बैठक बुला ली, जिसमें उन्होंने नए मुख्यमंत्री के रूप में नारायण राणे के नाम का ऐलान कर दिया।

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