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लूडो तकदीर का खेल या बेहतर स्किल? बॉम्बे हाई कोर्ट करेगा फैसला

मुंबईलूडो के खेल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि लूडो कौशल का नहीं, तकदीर का खेल है। इस पर पैसे का दांव लगाया जा रहा है, इसलिए लूडो के ऐप चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

याचिकाकर्ता केशव मुले के मुताबिक लूडो का खेल एक सामाजिक बुराई के रूप में सामने आ रहा है। इस खेल में चार लोग हिस्सा लेते हैं और 5-5 रुपये का दांव लगाते हैं। जीतने वाले को 17 रुपये और ऐप चलाने वाले को 3 रुपये मिलते हैं। इसीलिए यह गैंबलिंग प्रतिबंधित कानून की धारा 3,4 और 5 के तहत आता है और ऐप चलाने वालों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जानी चाहिए।

हाई कोर्ट ने पूछा यह सवाल
याचिका पर न्यायमूर्ति एस.एस.शिंदे और जस्टिस अभय आहूजा की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत कैसे आन पड़ी।

‘बड़ी संख्या में युवा आ रहे चपेट में’
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लूडो के नाम पर जुआ खेला जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इस खेल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसीलिए याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप के लिए गुहार लगाई है।

निचली अदालत ने नहीं दिया एफआईआर का आदेश
हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले याचिकाकर्ता ने निचली अदालत में अर्जी दायर की थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, निचली ने अदालत ने इसे कौशल का खेल करार देते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया। इसीलिए उसने हाई कोर्ट का रुख किया।

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