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'अगर वैक्सीनेशन के यही हालात रहे तो खतरनाक होगी कोरोना की तीसरी लहर', एक्सपर्ट ने चेताया

नई दिल्ली
इस वक्त दिल्ली में वैक्सीन की किल्लत है। सरकारी सेंटर्स पर है, तो वहीं प्राइवेट सेंटर्स पर वैक्सीन का भरपूर स्टॉक देखा जा रहा है। इन प्राइवेट अस्पतालों में अलग-अलग रेट में वैक्सीन लगाई जा रही है। कहीं इसका दाम 800 रुपये है, कहीं एक हजार तो कहीं 1200 रुपये में वैक्सीन लगाई जा रही है। कोवैक्सीन का दाम इससे भी ज्यादा है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को सभी प्राइवेट सेंटर्स पर वैक्सीन का एक दाम फिक्स कर देना चाहिए।

एम्स में एनेस्थिसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के प्रफेसर डॉ़ युद्धवीर सिंह का कहना है कि सभी प्राइवेट सेंटर्स पर वैक्सीन लगाने के मनमाने दाम लिए जा रहे हैं। जिन लोगों के पास पैसा है, वह वहां जाकर वैक्सीन लगवा रहे हैं, लेकिन जिन लोगों के पास पैसा नहीं है, वह प्राइवेट सेंटर्स पर वैक्सीन नहीं लगवा सकते और सरकारी सेंटर्स पर वैक्सीन मिल नहीं रही।

ऐसे में बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो इस वक्त वैक्सीन नहीं लगवा पा रहे हैं। इस वक्त जरूरत है कि सभी प्राइवेट सेंटर्स पर एक दाम तय कर दिए जाएं। सरकार को चाहिए कि वह इसमें दखल दे और प्राइवेट सेंटर्स में चार्ज किए जा रहे मनमाने दाम पर रोक लगाए। एक कीमत तो तय की ही जाए, साथ ही दाम कम भी किए जाएं। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीन लगवा सकेंगे। फिलहाल स्थिति यह है कि जो प्राइवेट सेंटर, दूसरे प्राइवेट सेंटर के मुकाबले कम दाम में वैक्सीन लगा रहा है, वहां ज्यादा भीड़ है। कीमत एक हो जाएगी तो सभी सेंटर्स पर सामान्य संख्या में लोग देखने को मिलेंगे।

डॉ. युद्धवीर सिंह का कहना है कि अगर दिल्ली में वैक्सीनेशन को लेकर यही स्थिति रही, तो तीसरी वेव खतरनाक रूप ले सकती है। दिल्ली में सेकंड डोज बेहद कम लोगों को ही लग पाई है, इसलिए जरूरी है कि वैक्सीनेशन की स्पीड को बढ़ाया जाए। प्राइवेट सेंटर्स पर दाम तय किए जाएं, ताकि ज्यादा वैक्सीन लग सकें। मैक्स अस्पताल के डॉ़ विवेका कुमार का कहना है कि तीसरी वेव आने की बात कही जा रही है और वह किसी भी वक्त आ सकती है। इसलिए जरूरी है कि तैयारी पूरी कर ली जाए और इन तैयारियों में सबसे ऊपर है वैक्सीनेशन। इस वक्त जरूरत है बेहद तेजी से वैक्सीनेशन करने की और कम से कम समय में बड़ी आबादी को वैक्सीन लगाने की। अगर बड़ी आबादी को वैक्सीन लग जाएगी तो तीसरी वेव का कम खतरा होगा, लेकिन वैक्सीन नहीं लगती और अभी जैसी ही स्थिति रहती है तो भारी नुकसान हो सकता है।

‘ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन पर विचार करने की जरूरत’
डॉ़ युद्धवीर सिंह का कहना है कि ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन पर एक बार विचार करने की जरूरत है] क्योंकि इससे ऑर्ब्जवेशन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। वैक्सीनेशन के बाद आधे घंटे तक ऑर्ब्जवेशन में रहना जरूरी है लेकिन ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन में ऐसा नहीं हो रहा। इसमें वैक्सीन की कोल्ड चेन मेंटेन करने में भी परेशानी आ सकती है, इसलिए ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

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