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सुशील कुमार को कम पड़ रहा जेल का खाना, प्रोटीन वाला खाना देने की मांग

नई दिल्ली: पहलवान सागर धनकड़ हत्याकांड में तिहाड़ की मंडोली जेल पहुंचे पहलवान का पेट नहीं भर पा रहा है। वह जेल की आठ रोटियों, दो कप चाय और चार बिस्कुट को कम बता रहे हैं। सुशील का कहना है कि उनका पेट अन्य कैदियों को मिलने वाली खुराक से नहीं भरने वाला। उन्हें कुछ एक्स्ट्रा प्रोटीन और अधिक खाना चाहिए होता है। बताया जाता है कि जरूरत पड़ी तो वह इस बारे में कोर्ट से भी रिक्वेस्ट कर सकते हैं कि उन्हें अधिक डाइट दी जाए। पहलवान सुशील कुमार की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। जेल प्रशासन ने बताया कि जेल में लाए जाने से पहले पुलिस ने सुशील का कोविड टेस्ट कराया था। इसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। जेल में आने के बाद सुशील का कोविड टेस्ट नहीं कराया गया है। जरूरत लगी तो जेल में भी कोविड टेस्ट कराया जाएगा।

जेल सूत्रों ने बताया कि बुधवार रात को तो विचाराधीन कैदी सुशील ने जेल के खाने के बारे में जेल अधिकारियों से कोई बात नहीं की। लेकिन गुरुवार शाम को उन्होंने कहा कि जेल में उन्हें जो खाना मिल रहा है वह पर्याप्त नहीं है। उन्हें इससे अधिक खाना और वह भी अधिक प्रोटीन वाला डाइट चाहिए होगा। वह एक रेसलर हैं। उन्हें अपने शरीर को मेंटेन रखने के लिए सामान्य खुराक वाला खाना नहीं चल पाएगा। उन्हें कुछ एक्सट्रा चाहिए होगा। जरूरत के मुताबिक वह इसके लिए संबंधित कोर्ट से भी रिक्वेस्ट कर सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि पहलवान सुशील को जिस जेल नंबर-15 में रखा गया है, यह मंडोली की हाई रिस्क जेल है। इसमें अधिकतर चक्की यानी सेल ही हैं। 100 से अधिक सेल वाली इस जेल के एक सेल में सुशील को अकेले रखा गया है। इनके साथ अन्य किसी कैदी को नहीं रखा गया है ताकि अन्य किसी गैंगस्टर या गैंग से इन्हें किसी तरह का खतरा पैदा न होने पाए। वैसे, आमतौर पर अन्य कैदियों को जेल प्रशासन कोरोना के चलते पहले 14 दिनों के लिए मंडोली की टेंपररी जेल में रखते हैं। लेकिन, मामला ओलिंपिक डबल मेडल विजेता पहलवान का है, इसलिए जेल प्रशासन ने कोई चांस न लेते हुए आरोपी को जेल नंबर-15 की अलग सेल में रखा है। इनके अन्य साथियों को इनके आसपास के सेल में रखा गया है।

जेल अधिकारियों का कहना है कि वैसे तो जिन भी गैंगस्टर से इन्हें खतरा है वे सभी तिहाड़ और अन्य जेलों में बंद हैं। लेकिन, कहीं कोई गैंगस्टर अन्य किसी कैदी के साथ मिलकर इनके ऊपर हमला ना करा दे, इस बात को भी देखते हुए इन्हें एकदम अलग सेल में रखा गया है। अन्य सेल की तरह इनके सेल में भी 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे से निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए एक जवान को अलग से तैनात कर दिया गया है। जवानों द्वारा अलग से भी निगरानी की जा रही है।

जेल अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुशील कुमार की इनके वकील से बात कराई गई। जबकि एक भाई से फोन पर बात कराई गई। कोरोना की वजह से मुलाकात बंद होने की वजह से परिवार के लोगों से जेल अधिकारी फोन पर ही बात करा रहे हैं।

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