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पृथ्वी पर जीवन बनाएं रखने के लिए पर्यावरण में संतुलन है आवश्यक : डॉ एन कुमार स्वामी

गरियाबंद: संयुक्त राष्ट्रसंघ के द्वारा प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व को पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में जागरूक करना है। इस दशक 2021 से 2030 के लिए यूएन ने विश्व पर्यावरण दिवस के लिए पुनर्कल्पना, पुनर्रचना, पुनर्वास विषय का चयन किया है।

हमने कई वर्षों से प्रकृति के पारिस्थितिक तंत्रों के साथ खिलवाड़ किये है। अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण से खिलवाड़ से पीछे नहीं हटते है। मोटरगाड़ियों से उगलते धुएं, कारखानों से निकलने जहरीले अपशिष्ट और नाना प्रकार के प्रदूषण कारकों से हमने अपने ही आसपास के वातावरण को दूषित कर दिया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, हम हर तीसरे सेकंड, फुटबॉल ग्राउंड के बराबर वन समाप्त कर रहे है। ज्ञातव्य है कि वनों के समाप्ति के साथ वनों से जुड़ी हुई संपदा जीव जंतु नष्ट हो रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन से ग्लोबल वार्मिंग का संकट भी प्रबल हो गया है ऐसा माना गया है कि 2050 तक ग्लोबल वार्मिंग डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगी। प्रकृति में कार्बन का अवशोषण दिन प्रतिदिन कम होते जा रहा है। वैश्विक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन पिछले 3 वर्षों में कई गुना बढ़ गया है। यह आने वाले एक बहुत बड़े प्रलय का संकेत है।

कोविड-19 के इमरजेंसी में हम सभी ने अनुभव किया जा सकता है कि, किस प्रकार एक कृत्रिम वाइरस रूप बदल बदल हर वर्ग के लोगो को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है। हमने कभी सोचा ना होगा कि हवा की कमी से लोगो की मृत्यु होगी और हमने देखा कि हमारे कई प्रियजन ऑक्सीजन की कमी के कारण अपने प्राण छोड़ गए और इसी कारण से मृत्युदर में कई गुना इजाफा हुआ। यह भी अनुभव हुआ कि पर्यावरण से छेड़छाड़ के कितने गंभीर परिणाम मानव जगत को भुगतना पड़ सकता है। इस प्रलय रूपी विपदा ने हमें इस बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमें पुनः आज से सैकड़ों वर्ष पहले के पारिस्थितिक तंत्र की पुनः कल्पना कर, उसे वापस चित्रित कर उसे वापस पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।

पुनर्स्थापना से आशय वनों का संरक्षण, संवर्धन, अपने आसपास एक ग्रीन कॉरिडोर, जल स्रोतों का रखरखाव और उन्हें संरक्षित, संवर्धित करने के नए उपाय तलाश करना है। सम्भवतः इन सभी प्रयासों का हमारे और हमारे आने वाले पीढ़ी को एक बेहतर भविष्य निर्माण करने की एक मजबूत नींव दे सकता है। यह भी मानना आवश्यक है पुनर्स्थापना पर यदि हम ₹1 खर्च करते है तो वह ₹1 कम से कम आने वाले समय में आकस्मिक खर्च होने वाले लाखो को बचा सकता है।

पुनर्स्थापना के क्षेत्र में भी कई प्रकार के रोजगार के अवसर की संभावना है जिससे हमारा और कई परिवारों का जीवन यापन संभव है इस प्रकार से हम ना केवल हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर कल का निर्माण कर सकते हैं। हर दिन, हर मिनट, हर सेकंड में हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा प्रयास आने वाले दिनों में हमे एक बहुत बड़े त्रासदी से बचा सकती है। इस दिशा में हमें कम से कम प्रतिदिन 1 मिनट जरूर सोचना चाहिए, प्रयत्नशील रहना चाहिए और इस दिशा में एक कदम जरूर उठाना चाहिए।

लेखक
डॉ एन. कुमार स्वामी
डीन, आई एस बी एम विश्वविद्यालय
नवापारा (कोसमी), ब्लॉक: छुरा, जिला: गरियाबंद, छत्तीसगढ़

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