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जिंदगी की जंगः कोरोना ने पति को छीना, अब बच्चे को पालने के लिए खोज रहीं नौकरी

नई दिल्ली’कभी भी किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। न ही उन्होंने कभी किसी परेशानी के बारे में हमसे जिक्र किया। सुबह ऑफिस जाते थे, शाम को घर। उसके बाद पूरी शाम बच्चे और मेरे साथ रहते थे। कभी लगा ही नहीं कि मुझे भी घर से बाहर निकलकर नौकरी की तलाश में जाना पड़ेगा। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे परिवार को ही बुरी तरह से हिला कर रख दिया है। कभी सोचा न था कि पति इस तरह से हमेशा के लिए साथ छोड़ जाएंगे। सोच नहीं पा रही कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। मेरे दो छोटे बच्चे है, उनकी जिम्मेदारी मेरे पर ही है। फिलहाल नौकरी की तलाश में हूं।’ यह कहना है कोविड की वजह से अपने 41 साल के पति कृष्णा पंत को खो चुकीं हाउस वाइफ सविता का।

कोरोना महामारी ने कई लोगों के घर के कमाने वाले एकमात्र जरिये को छीन लिया। ऐसे में उनकी पत्नियों के सामने बच्चों को पालने के साथ ही परिवार चलाने की चुनौती आ गई है। बावजूद इसके महिलाओं ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। दिल्ली सरकार की तरफ से ऐसे परिवारों को मुआवजा दिए जाने की तैयारी की जा रही है। जानतें हैं ऐसी ही दो महिलाओं के बारे में

जिंदगी की जंगः कोरोना ने पति को छीना, अब बच्चे को पालने के लिए खोज रहीं नौकरी

नई दिल्ली

‘कभी भी किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। न ही उन्होंने कभी किसी परेशानी के बारे में हमसे जिक्र किया। सुबह ऑफिस जाते थे, शाम को घर। उसके बाद पूरी शाम बच्चे और मेरे साथ रहते थे। कभी लगा ही नहीं कि मुझे भी घर से बाहर निकलकर नौकरी की तलाश में जाना पड़ेगा। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे परिवार को ही बुरी तरह से हिला कर रख दिया है। कभी सोचा न था कि पति इस तरह से हमेशा के लिए साथ छोड़ जाएंगे। सोच नहीं पा रही कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। मेरे दो छोटे बच्चे है, उनकी जिम्मेदारी मेरे पर ही है। फिलहाल नौकरी की तलाश में हूं।’ यह कहना है कोविड की वजह से अपने 41 साल के पति कृष्णा पंत को खो चुकीं हाउस वाइफ सविता का।

आगे क्या होगा, कुछ समझ नहीं आता
आगे क्या होगा, कुछ समझ नहीं आता

सविता बताती है कि दो साल पहले मदनगीर में डीडीए जनता फ्लैट में छोटा सा आशियाना खरीदा था। पति ने कभी जिक्र नहीं किया कि लोन की कितनी किस्त जाती है। सविता आगे बताती है कि डर लगता है कि कैसे लोन की किस्त भरेंगे। बच्चों की सभी जिद्द या ख्वाहिश पूरी कर पाऊंगी। जिस तरह उनके पिता करते थे। जिस तरह के सपने अपने बच्चों के लिए उन्होंने देखा था। क्या वो सपने मैं पूरा कर पाऊंगी। 11 साल का बेटा प्राइवेट स्कूल में पड़ता है। स्कूल की फीस 1000 रुपये महीने जाती है। खाना-पीना अलग से। सोचती हूं नौकरी करूंगी। लेकिन, 12वीं तक ही पढ़ाई की है। फिर समझ नहीं आता कि किस तरह की नौकरी मिलेगी। भविष्य के बारे में सोचती हूं तो आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। आगे क्या होगा, कुछ समझ नहीं आता।

​’पति के जाने के बाद कैसे दूं बच्चों की फीस, कैसे चलेगा घर’
​'पति के जाने के बाद कैसे दूं बच्चों की फीस, कैसे चलेगा घर'

द्वारका में रहने वाली निर्मला (बदला हुआ नाम) को यह अंदेशा भी नहीं था कि उनकी जिंदगी इतनी मुश्किल होने जा रही है। कोरोना ने एक ही झटके में पति को छीन लिया। पति के जाने का सदमा तो है ही, अब आर्थिक संकट भी आ खड़ा हुआ है। निर्मला के पति प्राइवेट जॉब करते थे। सब ठीक चल रहा था लेकिन अचानक ही कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में उनके पति आ गए और काफी कोशिशों के बावजूद 30 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई। घर पति के वेतन से ही चल रहा था। उनके जाने के बाद अब घर में निर्मला और दो बच्चे हैं, जो कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में अब दोनों की पढ़ाई के खर्च के साथ ही घर चलाने का भी संकट है।

निर्मला बताती हैं कि कोरोना की वजह से पिछले साल पति के वेतन में कुछ कटौती हो गई थी। उस वक्त भी थोड़ी दिक्कत हुई थी तो कॉलेज से अनुरोध किया था कि वे फीस में कुछ छूट दे दें लेकिन कॉलेज ने कोई रियायत नहीं दी। यहां तक की फीस न देने की वजह से बच्चे का रोल नंबर तक रोक लिया था। उसके बाद किसी तरह से किस्तों में पति ने फीस चुका दी थी। अब भी कॉलेज फीस के मामले में कोई रियायत देगा या नहीं, ये तो कॉलेज खुलने के बाद ही पता चल सकेगा। खुद गृहिणी हैं इसलिए नौकरी मिलने की उम्मीद नहीं है। बच्चों की पढ़ाई छूटती है तो उनका कैरियर ही चौपट हो जाएगा। ऐसे में निर्मला को लगता है कि सरकार उसकी तरह के परिवारों के लिए कुछ पेंशन का इंतजाम करे ताकि घर का गुजारा चल सके और कम से कम बच्चो की पढ़ाई जारी रह सके।

कोरोना से मरने वालों को परिजनों को मुआवजा देने की तैयारी
कोरोना से मरने वालों को परिजनों को मुआवजा देने की तैयारी

कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की योजना तैयार कर ली गई है, जिसे ‘मुख्यमंत्री कोविड-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना’ का नाम दिया गया है। ऐसे हर परिवार को, जिनके यहां कोरोना की वजह से मौत हुई है, उन्हें 50-50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे परिवार, जिनमें कमाने वाले व्यक्ति की मौत हो गई है, उन्हें 50 हजार रुपए मुआवजे के साथ-साथ 2500 रुपए महीना पेंशन भी दी जाएगी। अगर पति की मौत हुई है, तो पेंशन पत्नी को मिलेगी। अगर पत्नी की मौत हुई है तो पेंशन पति को मिलेगी। अगर कोई व्यक्ति विवाहित नहीं था, तो वह पेंशन उसके मां-बाप को मिलेगी। कुल मिलाकर ऐसे हर परिवार को 2500 रुपए महीना पेंशन दी जाएगी, जिनके परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की मौत हुई है।

दिल्ली सरकार हर पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सिविल डिफेंस वॉलंटियर के तौर पर नियुक्त करने पर भी विचार करेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए अप्लाई किया जा सकेगा। साथ ही, एसडीएम ऑफिस की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी कि जो लोग डॉक्युमेंट अपलोड नहीं कर सकते, उनके घरों से डॉक्युमेंट लेकर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। इसके बारे में सरकार की ओर से पूरी डिटेल जारी की जाएगी। दिल्ली में कोरोना से अभी तक 24 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और इन सभी लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि मृतकों में 55 से 60 फीसदी ऐसे हैं, जो अपने घर में कमाने वाले थे।

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