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क्या डेल्टा प्लस की वजह से आएगी भारत में तीसरी लहर, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

लखनऊ
कोरोना वायरस के लगातार म्यूटेशन ने डॉक्टर्स- वैज्ञानिकों के साथ आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। इन दिनों कोरोना वायरस का नया वेरिएंट डेल्टा प्लस सुर्खियों में बना हुआ है। यह डेल्टा वेरिएंट का ही अपग्रेटेड रूप है जिसने दूसरी लहर के दौरान देश में तबाही मचाई थी। अब डेल्टा प्लस के केस भी कई राज्यों में रिपोर्ट किए जा रहे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि अगर तीसरी लहर आती है तो डेल्टा प्लस वेरिएंट भी उसकी एक वजह हो सकता है। इस दावे में कितनी सच्चाई है और डेल्टा प्लस वेरिएंट से हमें कितना सतर्क रहने की जरूरत है, इस पर बीएचयू के जूलॉजी विभाग के प्रफेसर डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे से बातचीत-

सवाल- ? इसे संभावित तीसरी लहर का कारण बताया जा रहा है।
जवाब- दूसरी लहर का कारण डेल्टा वेरिएंट था। डेल्टा वेरिएंट की संक्रामकता दर काफी ऊंची थी। इस वजह से भारत में बहुत अधिक केस देखने को मिले। अब इस वेरिएंट के साथ एक और म्यूटेशन जुड़ चुका है – K417n, इसलिए इसे डेल्टा प्लस वेरिएंट नाम दिया गया। यह म्यूटेशन पहले अफ्रीकन वेरिएंट (बीटा वेरिएंट) के साथ जुड़ा था। इसकी खासियत यह थी कि जिसके शरीर में एंटीबॉडी का स्तर कम होता है, बीटा वेरिएंट उसे भी दोबारा संक्रमित कर सकता था।

डेल्टा प्लस पर अभी निगरानी रखनी होगी क्योंकि सारे वेरिएंट खतरनाक नहीं हो सकते। दूसरी चीज यह भी है कि भारत में डेल्टा वेरिएंट बड़ी आबादी को संक्रमित कर चुका है। ऐसे में वहां ऐंटीबॉडी भी बन चुकी है और उसे भेदने वाला वेरिएंट अभी नहीं आया है। अभी हम नहीं कह सकते कि डेल्टा प्लस तीसरी लहर का कारण बनेगा या नहीं। कम से कम 6 महीने का वक्त लगेगा कोई लहर आने में।

सवाल- किसी वायरस को वेरिएंट ऑफ कंसर्न कब घोषित किया जाता है?

जवाब-किसी भी वायरस के वेरिएंट को तब खतरनाक माना जाता है जब वह तेजी से बहुत सारे देशों में फैल जाता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट पहले से ही कई देशों में मौजूद है। इसके साथ एक और म्यूटेशन जुड़ गया- K417n जो Immune Evasion यानी प्रतिरक्षा को भेदने की प्रॉपर्टी रखता है हालांकि लेकिन यह गुण इसमें आंशिक है। अगर पूरी तरह से Immune Evasion की प्रॉपर्टी रखता, तब यह बहुत खतरनाक होता। तब यह उन सभी को संक्रमित कर सकता था जिन्हें वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

सवाल- डेल्टा प्लस के जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए बीएचयू को भी सेंटर बनाया गया है, कितनी मदद मिलेगी?

जवाब- पूर्वांचल की बात करें यहां पहली लहर में भी नुकसान हुआ था और दूसरी लहर में भी। पूर्वांचल में पहली लहर में सिर्फ दो सिक्वेंसेंस उपलब्ध थे। हमें पता नहीं था कि किस वेरिएंट की वजह से इतने केस बढ़े। दूसरी लहर में हैदराबाद की सीसीएमबी इंस्टिट्यूट से हमने सहयोग लिया, तब सिक्वेंसिंग के जरिए पता लगाया कि 36 फीसदी केस डेल्टा वेरिएंट के हैं। इसी वजह से इतने केस बढ़े, इतनी मौतें हुईं। जब भी देश में एक साथ कोरोना के केस बढ़ते हैं तो वाराणसी में भी केस बढ़ जाते हैं। वाराणसी हॉट स्पॉट क्षेत्रों में बना रहता है। यहां हमेशा सर्विलांस की जरूरत है इसलिए सरकार के इस कदम से काफी मदद मिलेगी।

सवाल- डेल्टा प्लस पर वैक्सीन कितनी मारक होगी?

जवाब- अभी तक ऐसा कोई वेरिएंट नहीं आया है जो वैक्सीन को बाईपास कर सके या उससे बनीं ऐंटीबॉडी को भेद सके। वैक्सीन की डोज लगने के बाद भी लोगों संक्रमित होते हैं लेकिन उनमें अस्पताल जाने के केस और मृत्यु की संभावना कम रहती है। वैक्सीन का असर हमेशा बड़ी आबादी में देखा जाता है न कि किसी अकेले शख्स में।

अब अगर पिछली लहर की बात करें तो डेल्टा वेरिएंट ने उन्हें भी इंफेक्ट किया जिन्हें वैक्सीन की सिंगल या डबल डोज लगी थी लेकिन उसमें से 2 या 4 केस छोड़ दिए जाएं तो अधिकतर लोगों को न ऑक्सिजन की जरूरत पड़ी न अस्पताल जाने की। अफ्रीकन वेरिएंट के साथ भी ऐसा ही है। वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों को संक्रमित कर रहा है लेकिन स्थिति बहुत गंभीर नहीं होगी।

सवाल-क्या कोरोना वायरस की अभी कई और लहरें भी आ सकती हैं?

जवाब- ये वायरस पहली बार इंसान के शरीर में आया। हमारे इम्यून सिस्टम को इस वायरस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस वायरस ने जब पहली बार मानव शरीर में प्रवेश किया तो इम्यून सिस्टम इसे समझ नहीं पाया था। पहली लहर में इसने कुछ लोगों को संक्रमित किया। 4 से 5 महीने बाद दूसरी लहर आई क्योंकि जो लोग ठीक हो चुके थे उनमें ऐंटीबॉडी का लेवल घट गया था।

फिर भी जिन लोगों में दोबारा इंफेक्शन हुआ उनमें अस्पताल जाने और मौत की संभावना कम थी लेकिन जिन्हें कभी इंफेक्शन नहीं हुआ था उसमें बहुत सारे लोग अस्पताल गए और मौतें भी हुईं। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो अगर वायरस का ऐसा वेरिएंट आए जो सबको संक्रमित करने लगे ज 100 फीसदी तक प्रतिरक्षा को भेद सके, तभी ऐसा होगा वरना दूसरी लहर जैसी स्थिति हम हमारे देश में नहीं आएगी।

सवाल- वायरस के इतने अधिक म्यूटेशन के पीछे क्या वजह है?

जवाब- वायरस जब शरीर में जाता है तो बहुत सारी कॉपी बनाता है उन कॉपी में बहुत सारे म्यूटेशन होते हैं। कुछ म्यूटेशन ऐसे होते हैं जो इम्यूनिटी के विरुद्ध काम करने के लिए वायरस की मदद करते हैं। इसी वजह से एक शख्स को संक्रमित करने के बाद वायरस दूसरे को भी संक्रमित कर देते हैं। जितना ज्यादा वायरस संक्रमित करेगा, उतना ही म्यूटेशन ज्यादा होगा। इसीलिए हम लोग इस बात पर स्ट्रेस देते हैं कि वायरस का इंफेक्शन कम हो तो उससे कम वेरिएंट बनेंगे और हम इससे बच जाएंगे।

सवाल- संभावित तीसरी लहर से बचने के लिए क्या सतर्कता रखनी चाहिए?

जवाब- पहली लहर के बाद ज्यादातर लोग ये मानने लगे थे कि भारत में इम्यूनिटी बन चुकी है और हम यह जंग जीत गए हैं लेकिन यही हमारी सबसे बड़ी कमी थी। तीसरी लहर की बात करें तो अब हमारे पास वायरस की समझ ज्यादा है। हमें ये पता करना है कि तीसरी लहर कब आएगी। इसके लिए उपाय भी हैं। अगर हम सीरो सर्विलांस और वायरस सर्विलांस के साथ सीवर सर्विलांस करते रहे हॉटस्पॉट क्षेत्रों में तो हम एक महीने पहले ही इसकी लहर की भविष्यवाणी कर सकते हैं और उसके अनुसार उपाय कर सकते हैं।

इसके अलावा और भी विधियां हैं जिनपर हम काम कर रहे हैं। अभी एक वायरस को सीक्वेंस करने में 10 से 15 हजार का खर्च आता है। हम लोग इसका खर्च कम करके 1 हजार रुपये में करने की कोशिश कर रहे हैं। शायद एक से दो महीने में यह संभव हो जाएगा तो इससे हम बड़ी संख्या में सैंपल को सीक्वेंस कर सकते है और वायरस के वेरिएंट का पता लगा सकते हैं।

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