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पूरे परिवार को था कोरोना, खुद चलते हैं तो दम फूलता है, मगर फर्ज की राह में आराम मंजूर नहीं

नई दिल्ली
डॉक्टरों का जज्बा और हिम्मत ही है कि आज देश कोरोना महामारी जैसी विकराल स्वास्थ्य समस्या से बाहर निकलने की कोशिश में जुटा है। डॉ. वरुण गर्ग एक ऐसे ही डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर कोविड मरीजों के इलाज में खुद को झोंक दिया। अपने काम के प्रति इनका समर्पण ऐसा है कि खुद कोरोना की चपेट में आने के बाद वह बुरी तरह से निमोनिया के शिकार हो गए, अभी इसका असर इतना है कि चलने में सांस फूलने लगती है, लेकिन वरुण कहां रुकने वाले हैं। उन्होंने अस्पताल जॉइन किया और फिर से कोविड मरीजों के इलाज में जुट गए। 1 जुलाई को नैशनल डॉक्टर्स डे होता है, इस दिवस पर इससे प्रेरक और कोई उदाहरण नहीं हो सकता।

घर में सभी हो गए थे कोरोना पॉजिटिव
एलएनजेपी अस्पताल की एक्सिडेंटल इमरजेंसी में बतौर सीएमओ काम करने वाले डॉक्टर वरुण गर्ग ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर मेरे जीवन का सबसे बुरा वक्त था। वह दिन याद करके मैं आज भी सिहर उठता हूं। मेरे घर में सभी कोविड पॉजिटिव हो गए। मैं, मेरी पत्नी, बच्चा, मेरी मां सभी संक्रमित हो गए। लेकिन सबसे खराब स्थिति मेरी हो गई। मेरा ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल 84 पर आ गया था। मुझे तुरंत सीसीयू में एडमिट कर लिया गया और इलाज चला। संक्रमण का असर ऐसा हुआ कि मेरा लंग्स खराब होने लगा, सीटी स्कैन का स्कोर 17 पर पहुंच गया था।

अभी भी चलने पर फूलने लगती है सांस
डॉक्टर वरुण ने कहा कि लेकिन मेरे सीनियर और साथी डॉक्टरों ने इस डरावने समय में मेरा साथ दिया। मेरा इलाज किया। हौसला बढ़ाया। मेरे दुख-दर्द में साथ खड़े रहे। मेरे विभाग की एचओडी डॉक्टर रितु सक्सेना ने हर कदम पर साथ दिया, इसी का नतीजा है कि मैं ठीक हो पाया। इस अस्पताल को और मेरे साथ काम करने वाले मेरे साथी डॉक्टरों को मैं भूल नहीं सकता। हालांकि, पोस्ट कोविड भी मुझे परेशानी रही। मैं घर पर भी बिना ऑक्सिजन के बात नहीं कर पाता था। लेकिन, धीरे-धीरे मेरे ऑक्सिजन सपोर्ट में सुधार हुआ। लेकिन मैं अभी भी चलता हूं, तो सांस फूलने लगती है। लेकिन, कब तक घर पर बैठा रहूं और मेरे साथी डॉक्टर काम करते रहें। इसीलिए मैंने काम करने का फैसला किया और फिर से कोविड ड्यूटी जॉइन की। भले ही मुझे कुछ दिक्कत है, खांसी होती है, लेकिन अस्पताल आने के बाद मुझे अच्छा लगता है।

मरीजों की सेवा सबसे ऊपर
डॉ. वरुण ने कहा कि इस महामारी ने मेरे परिवार के कई लोगों को छीन लिया। ऐसा दर्द दिया है कि भूल नहीं सकते। लेकिन, मैं जिस प्रोफेशन में हूं, वहां पर मरीजों की सेवा सबसे ऊपर है। जैसा मुझे इलाज मिला, वैसा ही हर किसी को मिले, यही सोचकर मैंने जॉइन किया, ताकि मैं अपनी तरफ से मरीजों की सेवा में कोई कमी नहीं आने दूं। हां, थोड़ी दिक्कत है, लेकिन यह समय दिक्कतों से हार मानने का नहीं, बल्कि इस चुनौती को स्वीकार कर इससे लड़ने का है। इसलिए, मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि इस महामारी में मिलकर काम करें, जागरूक रहें और कोविड गाइडलाइंस का पालन करें, एक दिन जरूर हम इसे हराएंगे और फिर से हमारी जिंदगी बेहतर व सुकून वाली होगी।

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