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गरीब बच्चे कैसे पढ़े ऑनलाईन, ना स्मार्ट फोन, ना मंहगी किताबें?

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 6500 प्राईवेट विद्यालयों में वर्तमान में लगभग 3,20,000 बच्चे शिक्षा के अधिकार के अतर्गत पढ़ रहे है। यह बच्चें गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों से आते है जिनके पालकों के पास की-पैड वाला परंपरागत मोबाइल होता है, जबकि ऑनलाईन क्लासेस हेतु महंगे स्मार्ट फोन की जरूरत है, इतना ही नहीं बच्चों को मंहगे-मंहगे कॉपी-किताब स्वयं खरीदने पड़ रहे है,

क्योंकि सरकार (राज्य और केन्द्र) के द्वारा आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान विगत दो वर्षो से नहीं किया है।
छत्तीसगढ़ पैरेट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण गरीब तबका विगत एक वर्ष से ऐसे की मंदी की मार झेल रहा है और जैसे-तैसे अपना जीवन-यापन कर रहा है।

प्राईवेट स्कूलों में नर्सरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के बच्चों के लिए ऑनलाईन क्लासेस दिनांक 1 अप्रैल से आरंभ हो हुआ था और पुनः 15 जून से ऑनलाईन क्लासेस आरंभ होने वाला है और इस ऑनलाईन क्लासेस से आरटीई के बच्चे प्रभावित हो रहे है और उनके पालक परेशान हो रहे है, क्योंकि कई बच्चे जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है और जिन बच्चो ने मंहगी-मंहगी कॉपी-किताब नहीं खरीदा है वे शिक्षा से वंचित हो रहे है।

ऑनलाईन क्लासेस

ऑनलाईन क्लासेस आरंभ होने से आरटीई के बच्चों के साथ भेदभाव हो रहा है, क्योंकि बीत वर्ष भी इन बच्चों की राज्य सरकार ने कोई सूध नहीं लिया, जबकि दिल्ली सरकार ने अपने राज्य में ईडब्ल्युएस वर्ग के बच्चों को मोबाईल और डाटा उपलब्ध कराया था, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में भी आरटीई के बच्चों को मोबाईल और डाटा उपलब्ध कराने की मांग किया गया था, लेकिन बीते वर्ष आरटीई के बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कुछ नहीं किया।

पॉल ने बताया कि बीते सत्र 2020-21 में प्रदेश में लगभग 300 प्रायवेट स्कूल बंद हो गए थे और इन स्कूलों में आरटीई बच्चों को किस अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाना था जो आज तक नहीं किया गया है। पॉल का आरोप है कि छत्तीसगढ़ सरकार के पास आरटीई के प्रवेशित बच्चों को कैसे ऑनलाईन पढ़ाई कराया जाएगा, इस संबंध में कोई ठोस कार्य योजना नहीं है और ना अब तक कोई इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया गया है।

पॉल ने इस मामले को लेकर अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली को पत्र लिखकर तत्काल उचित कार्यवाही करने की मांग किया गया है, ताकि प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित 3,20,000 बच्चों को भी निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का लाभ दिया जावे, चाहे पढ़ाई ऑनलाईन या वर्चुवल क्लासेस के माध्यम से कराया जा रहा है।

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