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दिल्लीः कोविड पीक के समय भी तोड़े नियम, 42 दिनों में 8300 FIR दर्ज

नई दिल्ली
अप्रैल-मई महीने में अस्पतालों से ज्यादा भीड़ श्मशानों में थी, बावजूद इसके अपनी जान खतरे में डालने वाले लाखों लोग थे। लगभग आठ हजार लोग तो ऐसे थे, जिनके पास जुर्माना भरने के भी पैसे नहीं थे, लेकिन बिना किसी काम के सड़क पर घूमने से बाज नहीं आए। पुलिस के मुताबिक, कोरोना की इस लहर में 19 अप्रैल से लेकर 31 मई तक लगभग 8300 लोगों के खिलाफ सरकारी आदेश न मानने पर (आईपीसी 188) एफआईआर दर्ज की गई है। यह सिर्फ 42 दिनों में पुलिस की तरफ से हुई कार्यवाही है, जबकि बीते साल लगभग 80 दिनों में 25 हजार के करीब एफआईआर दर्ज हुई थी।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुरू में पुलिस मास्क न पहनने या सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लघंन करने पर चालान की कोशिश करती है, हालांकि जब आरोपी के पास पैसे नहीं होते या वह नियमों को न मानने के बावजूद पुलिस से उलझने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है। हालांकि इस लहर में लोगों को खुद भी बचते हुए देखा गया है, क्योंकि अखबारों में लगातार अस्पतालों की हालत देखकर वे सतर्कता बरत रहे थे।

कोरोना के दौरान इन एफआईआर में दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एक्ट के तहत भी धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस के मुताबिक, कोविड के मामले जब सबसे अधिक थे, तब पुलिस की तरफ से कार्यवाही करने के बजाय लोगों को जागरूक करने की ज्यादा कोशिश थी। हालांकि बाद में अब पुलिस उन एफआईआर की चार्जशीट तैयार कर रही है। पुलिस के मुताबिक, यह चार्जशीट सिर्फ एक-दो पन्नों की ही होती है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में लोग चालान भरने में कोताही बरतते हैं। जब बहाने बनाने का पुलिस पर कोई असर नहीं होता, तो लोग पैसे न होने की बात कहते थे। आंकड़ों की मानें तो बीते साल मास्क न पहनने पर 5,132,57 चालान किए गए थे। जबकि थूकने के लिए 3,412, सोशल डिस्टेंसिंग न मानने पर 38,231 चालान हुए थे। इस साल 92 हज़ार से अधिक लोगों का मास्क न पहनने पर चालान काटा है। पुलिस ने जागरूकता के दौरान 4,167,50 मास्क बांटे थे।

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