हाईकोर्ट खंडपीठ संबंधी जोगी के बयान पर प्रतिक्रिया : वकीलों ने कहा – राज्य निर्माण के समय बनी सहमति को बिगाड़ने का प्रयास

हाईकोर्ट खंडपीठ संबंधी जोगी के बयान पर प्रतिक्रिया : वकीलों ने कहा – राज्य निर्माण के समय बनी सहमति को बिगाड़ने का प्रयास

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बिलासपुर । बिलासपुर
के अधिवकताओं ने  कोटा की विधायक रेणु जोगी
के द्वारा विधानसभा रायपुर जगदलपुर, और अम्बिकापुर में हाईकोर्ट की 
खंण्डपीठ बनाये जाने संबंधी प्रस्ताव लाने के बयान की कड़े शब्दों में निंदा
की है। अधिवकताओं ने कहा कि राज्य निर्माण के वक्त बनायी गयी आम सहमति, बिलासपुर-न्यायधानी और रायपुर-राजधानी को
बिगाड़ने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जायेगा।

                गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ एक छोटा राज्य है । जहां
की आबादी 3 करोड़ भी नही है । साथ ही
यहा हाई कोर्ट में लंम्बित मुकदमें इतने अधिक नही है कि यहा किसी खंण्डपीठ की आवश्यकता
हो।  सुप्रीम कोर्ट देश में केवल दिल्ली से
संचालित है और दक्षिण के राज्यों तथा उत्तर पूर्व के राज्यो के लिए उसकी दूरी 2000 से 3000 हजार किलोमीटर तक है  । उसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की कोई खंण्ड पीठ
स्थापित नहीं की जाती है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए न्याय की गुणवत्ता
सर्वोच्च मापदण्ड है  और अनावश्यक खंण्डपीठ
निर्माण से मुख्य न्यायाधीश  जो कि संस्था
के पिता तुल्य होते है ,उनका नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है।  इस कारण ही कई सालों से विभिन्न राज्यों में
हाई कोर्ट की बेंच की मांग होने के बावजूद कही भी बेंच की स्थापना नहीं की गई
है।  छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक लगभग 800 किलोमीटर में सिमट जाता है और बिलासपुर  इसके मध्य भाग में है  । अतः भौगोलिक दृश्टि से भी  किसी खंण्डपीठ की ज़रूरत नही है। केवल राजनीतिक
लाभ के नाम पर किये जा रहे इस तरह के प्रस्ताव को प्रथम चरण में ही नकारे जाने की
आवश्यकता है।

                अधिवक्ताओं के द्वारा यह सवाल पूछा गया कि अगर
आम जनता के लिए दूरी के नाम हाई कोर्ट की खंण्डपीठ मांगी जा रही है तो क्यो न
बिलासपुर , अम्बिकापुर  और जगदलपुर 
में उपराजधानी स्थापित कर दी जाये  । क्योकि आम जनता का हाईकोर्ट के मुकाबले ज्यादा
काम राज्य सरकार से पड़ता है।  इस तरह
बिलासपुर, अम्बिकापुर और जगदलपुर
में भी मंत्रालय और विधानसभा का निर्माण किया जाना चाहिए।

                अधिवक्ताओं के द्वारा सरगुजा और बस्तर क्षेत्र
को मजबूत बनाने के लिए राज्य का प्रशासन सेड्यूल पांच के प्रावधानों के अनुरूप आदिवासी
सलाहकार परिषद  के माध्यम से किये जाने को
ज्यादा बेहतर विकल्प बताया और कहा कि वन अधिकार कानून, पेसा कानून तथा ग्राम सभाओं को मजबूत कर आदिवासी क्षेत्रों
का अधिक विकास होगा और वहा मुकदमें बाजी घटेगी।

                अधिवक्तागण सुदीप श्रीवास्तव, विनय दुबे, लक्की यादव, प्रदीप राजगीर,
मनीष श्रीवास्तव और हिमांषु शर्मा एवं अन्य ने
कहा कि रेणु जोगी बिलासपुर जिले के मतदाताओं के साथ वफादारी निभाये और इस तरह के
किसी प्रस्ताव को विधानसभा में न लाये। साथ ही राज्य शासन से किसानों और
बेरोजागारो के लिए बजट में अधिक प्रावधान करने की मांग करते हुए कहा कि खंण्डपीठ
निर्माण के लिए स्थापना व्यय को अनावश्यक बढ़ाना कही से भी उचित नहीं है।

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