स्मृति शेष:जीवटता–कर्मठता की मिसाल बनकर यादों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे…सुरेश केडिया

स्मृति शेष:जीवटता–कर्मठता की मिसाल बनकर यादों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे…सुरेश केडिया

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जिस तरह बिल्हा शहर सांस्कृतिक -साहित्यिक -राजनीतिक -सामाजिक –व्यपारिक गतिविधियों का संगम है । कुछ वैसा ही समाज सेवा , राजनीति और पत्रकारिता का अनूठा संगम था सुरेश केडिया का व्यक्तित्व…….. । जैसे बिल्हा शहर छत्तीसगढ़ में अपनी एक अलग पहचान रखता है , कुछ वैसी ही अलग पहचान के मालिक थे सुरेश केडिया …..। अद्भुत मिलनसार, सहज, सरल ,प्रेम पूर्ण व्यवहार, मृदुभाषी ,सबको साथ लेकर चलने में तत्पर और हर एक की मदद के लिए हमेशा तैयार सुरेश केडिया बारह अगस्त को गोलोकवासी हो गए । लेकिन अपने पीछे ऐसी पहचान छोड़ गए हैं ,जो उनके परिवार ,मित्र और शुभचिंतकों के लिए हमेशा यादगार बनी रहेगी और सभी की यादों में उनकी जीवटता – कर्मठता हमेशा जिंदा रहेगी….। बिल्हा – बिलासपुर ही नहीं वरन् पूरे छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स सुरेश केडिया के रूप में अपने जुझारू साथी को कभी नहीं भूल पाएंगे….. जो हर लड़ाई में हमेशा आगे रहे और आने वाले समय में भी प्रेरणा देते रहेंगे।

स्वर्गीय श्री रामाधीन केडिया जी के यहां 7 फरवरी 1955 को पैदा हुए सुरेश केडिया ने बीकॉम तक की शिक्षा हासिल की है । बिलासपुर के मल्टीपरपज़ स्कूल में वे प्रदेश के मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ चरणदास महंत के सहपाठी और रूम पार्टनर रहे । सुरेश केडिया की अभिरुचि जन सेवा में शुरू से ही रही है । वे स्व. श्री राजीव गांधी को अपना आदर्श राज नेता मानते रहे ।सुरेश केडिया ने छात्र – युवा समय से ही राजनीति में पदार्पण कर लिया था । आप 1968 से ही कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य रहे । 1980 में युवक कांग्रेस महामंत्री और 1985 में ब्लॉक कांग्रेस के महामंत्री बने । 1988 में उन्हें एल्डरमैन बनाया गया । 1991 से 1995 तक वे तत्कालीन सांसद के आर जांगड़े के सांसद प्रतिनिधि रहे । सेवादल में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया । बाद में उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी मिली। आप अविभाजित मध्य प्रदेश में प्रदेश व्यपार प्रकोष्ठ के महामंत्री रहे । राजनीति क्षेत्र में रहते हुए बिल्हा क्षेत्र से कई चुनावों का सफल संचालन भी करते रहे । साथ ही क्षेत्र की जन समस्याओं के निराकरण के लिए अपना रचनात्मक योगदान देते रहे । राजनीति के क्षेत्र में उनकी मुखरता को स्थापित छत्रप भी स्वीकार करते थे ।

व्यावसायिक क्षेत्र में भी उन्होने हमेशा ही इससे जुड़े सभी लोगों के हित की चिंता की और उचित मंच पर इस दिशा में अनवरत प्रयास करते रहे हैं। हाल के दिनों में भी जब भी चांवल उद्योग और कारोबार में चुनौतीपूर्ण स्थितियां आईं तब वे संघर्ष में आगे रहे और संगठनों को पूरी सक्रियता के साथ सहयोग दिया । जिससे सार्थक नतीज़े भी सामने आए। वर्तमान समय में आप छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य व प्रदेश ब्रोकर एसोसिएशन के संरक्षक पद पर थे ।सुरेश केडिया ने ग्रामीण क्षेत्र की पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई । वे एक सर्जक पत्रकार थे , जिनकी लेखनी सौर्य की तेजस्वी आभा से प्रदीप्त थी । वह 1973 से ही दैनिक समाचार पत्र नवभारत के बिल्हा संवाददाता बने और जीवन पर्यंत इस समाचार पत्र में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं देते रहे । उनका संबंध पत्रकारों के संगठनों से भी रहा और आप छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष थे।

सुरेश केडिया ने सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं । वे संभागीय अग्रवाल महासभा के उपाध्यक्ष रहे । जीवन के अंतिम क्षण तक प्रांतीय अग्रवाल सम्मेलन छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया । आप अग्रवाल सेवा समिति के अध्यक्ष , संरक्षक व शिक्षण समिति के अध्यक्ष भी रहे । उनकी प्रसिद्धि ना केवल अग्रवाल समाज को गौरवान्वित करने वाली थी, बल्कि सभी समाजों को सामाजिक समरसता का स्वर भी उन्होंने ही दिया । अग्रवाल समाज के अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में उन्होंने नगर में सामाजिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए श्री अग्रसेन जयंती – अग्रसेन दिवस के अवसर पर नगर के सभी सामाजिक संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित करने की स्वर्णिम परंपरा का श्रीगणेश किया । आप केड़ शक्ति धाम समिति राजस्थान के सचिव व छत्तीसगढ़ केडिया सभा के अध्यक्ष रहे व वर्तमान मे संरक्षक थे । उनके बारे में कहा जाता है कि अगर कोई विरोधी भी आए तो उसे मदद करने को तत्पर रहते रहे और हर किसी को उनका सहयोग हर समय मिलता रहा।

आपने धार्मिक क्षेत्र में भी रूचि रखते हुये बिल्हा नगर में राणी शक्ति दादी मंदिर में विशेष योगदान दिया। नगर के समीप ग्राम मोहभट्टा में स्थापित स्वम्भू महादेव मंदिर एवं प्रदेश के विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी का भी निर्वहन किया। सुरेश केडिया ने बिल्हा क्षेत्र में पत्रकारिता राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करते हुए क्षेत्र के विकास को एक दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । वे न सिर्फ क्षेत्र की समस्याओं को सामने लाते रहे ,बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव भी सामने रखते रहे । यही वजह है कि बिल्हा क्षेत्र, बिलासपुर जिला और छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोगों के बीच उनकी अपनी लोकप्रियता कायम है । वे अपने हर कार्य क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए पूरी जीवटता के साथ अंतिम सांस तक अपना योगदान देते रहे। सुरेश केडिया के व्यक्तित्व की यह भी ख़ासियत थी कि अपनी सक्रियता को उन्होने कभी भी अपने से अलग नहीं होने दिया । उनके जीवन में ऐसा भी दौर आया जब स्वास्थ्यगत परेशानियां उनके लिए चुनौती बनती रही । फ़िर भी कर्मठयोद्धा की तरह अंतिम समय तक जूझ़ते रहे।

शून्य से शिखर का सफर तय करने वाले जिंदादिल योद्धा जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इत्र दूसरों को महाकाने में लगा दिया। कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत ना हारने का गुण ,अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति जिनके पास सभी वर्गों के सीखने के लिए कुछ ना कुछ था ऐसे थे श्री सुरेश केडिया.. ।ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करे एवं हम सभी को उनके द्वारा स्थापित मानदंडों एवं मार्ग पर चलने का सामर्थ प्रदान करे । ।
शत् शत् नमन 🙏🙏
( समस्त परिवारजन और शुभचिंतक )

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