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विकास दुबे गिरफ्तार, जांच में सही निकला CO देवेंद्र मिश्र का पत्र



नई दिल्‍ली: एक नाटकीय घटनाक्रम के बाद करीब 6 दिन के बाद 8 पुलिसकर्मियों की हत्‍या करने वाले विकास दुबे को उज्‍जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि इसके साथ ही विकास दुबे के खिलाफ जो पत्र CO बिल्हौर देवेन्द्र मिश्र ने लिखा था, उसकी जांच भी पूरी हो गई है। आईजी लक्ष्मी सिंह ने जांच पूरी करने के बाद उसकी रिपोर्ट को डीजीपी को सौंप दिया है।

सूत्रों ने बताया है कि CO बिल्हौर देवेन्द्र मिश्र द्वारा थानाध्यक्ष चौबेपुर विनय तिवारी के खिलाफ एसएसपी को लिखा गया पत्र जांच में सही पाया गया है। यह वहीं पत्र है जोकि शहीद सीओ की बेटी ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। उसका कहना था कि अगर समय रहते उनके पिता के लिखे पत्र पर कार्रवाई हो जाती तो 8 पुलिसकर्मियों की मौत नहीं होती। इसके बाद पुलिस पर भी विकास दुबे को बचाने के आरोप लगे।

पत्र की जांच के लिए कानपुर भेजी गईं लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह लखनऊ वापस लौट आईं और जांच रिपोर्ट डीजीपी हितेश अवस्थी को सौंप दी है। लक्ष्मी सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जांच पड़ताल और CO के कार्यालय के स्टाफ से पूछताछ में पता चला है कि CO द्वारा एसएसपी को लिखा गया पत्र असली है। CO के कम्प्यूटर में यह पत्र मौजूद पाया गया और इस पत्र को कार्यालय में तैनात एक महिला सिपाही ने टाइप किया था। कम्प्यूटर ऑपरेटर से लेकर स्टाफ तक ने एसएसपी को भेजे गए इस पत्र की पुष्टि की है।
आईजी लक्ष्मी सिंह ने इस प्रकरण की और गम्भीरता से उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की संस्तुति भी की है।

ज्ञात रहे कि दो दिन पूर्व जब यह पत्र मीडिया में वायरल हुआ था तो एसएसपी कानपुर दिनेश कुमार ने ऐसे किसी भी पत्र के कार्यालय में प्राप्त होने की जानकारी से साफ इंकार कर दिया था। अब जांच में यह पत्र सही पाया गया है तो इस बात की भी जांच होनी चाहिये कि एसएसपी आफिस से इस पत्र को किसने गायब किया और इस पत्र पर पूर्व एसएसपी ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

एसएसपी को सीओ की चिट्ठी
”अभियुक्त विकास दुबे के खिलाफ कानपुर और दूसरे जिलों में करीब 150 मुकदमें संगीन मामलों में दर्ज है। हत्या, लूट के अभियोग पंजीकृत होने और उसके द्वारा शिवली थाने में घुसकर हत्या कर देने जैसे अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के मकसद और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेरे द्वारा चौबेपुर के थानाध्यक्ष को निर्देशित किया गया था। जब मेरे द्वारा एक विवेचक से पूछताछ की गई तो विवेचक ने बताया कि थानाध्यक्ष महोदय द्वारा कहे जाने पर धारा हटा दी गई है। इस प्रकार ऐसे दबंग कुख्यात अपराधी के खिलाफ थानाध्यक्ष द्वारा सहानुभूति बरतना और अबतक कोई कार्रवाई न करना विनय कुमार तिवारी की सत्यनिष्ठा पूर्णत: संदिग्ध है।”

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