राजधानी पुलिस की ऐसी बेचारगीः एक महीने में ये नहीं तय कर पाई कि क्वींस क्लब में लाॅकडाउन और महामारी एक्ट का उल्लंघन का जिम्मेदार किसे माना जाए, लाचार पुलिस अब आरोपियों का नाम समझने भारत सरकार को पत्र लिखेगी

राजधानी पुलिस की ऐसी बेचारगीः एक महीने में ये नहीं तय कर पाई कि क्वींस क्लब में लाॅकडाउन और महामारी एक्ट का उल्लंघन का जिम्मेदार किसे माना जाए, लाचार पुलिस अब आरोपियों का नाम समझने भारत सरकार को पत्र लिखेगी


रायपुर, 25 अक्टूबर 2020। राजधानी के क्वींस क्लब की शराब पार्टी में गोली कांड को एक महीना पूरा होने जा रहा है। मगर हैरानी है…तेज तर्रार और स्मार्ट पुलिस कहलाने को तत्पर रायपुर पुलिस को घटना के बाद यही समझ में नहीं आ रहा है कि अगर क्लब में लॉकडाउन और महामारी एक्ट का उल्लंघन हुआ है तो इसका जिम्मेदार किसे माना जाए।
ज्ञातव्य है, सबसे कड़ा लाॅकडाउन, जिसमें पुलिस ने दावा किया था कि अबकी लाॅकडापउन में परिंदा पर नहीं मार पाएगा, 27 सितंबर की रात वीआईपी रोड पर स्थित रईसजादों के क्वींस क्लब में गोली चल गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस को इतना समझ आया कि क्लब के संचालन का अधिकार इमिनेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के पास है। इसलिए कंपनी के डायरेक्टर हरबक्श बत्रा समेत कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। हरबक्श बत्रा ने पुलिस के सामने एक डील के कागजात पेश किए, जिसमें बताया गया कि इमनेंट कंपनी में नवंबर 2019 में 9.11 करोड़ के सौदे के बदले क्लब के संचालन का अधिकार जैन और सिंघानिया परिवार के चार सदस्यों को दे दिया है। इसलिए वह क्लब में हुई पार्टी के लिए जिम्मेदार नहीं है। पुलिस ने बड़ी मासूमियत के साथ कागजात पर आँख मूंद कर भरोसा किया, और बत्रा और उसके परिवार के पांच डायरेक्टर सदस्यों को क्लीन चीट दे दी। ना तो उनका नाम एफआईआर में जोड़ गया, ना गिरफ्तारी हुई।
जबकि, क्वींस क्लब में रसूख के नाम पर जो खेल हुआ, उसका असल खिलाड़ी हरबक्श सिंह बत्रा और उसके परिवार के डायरेक्टर सदस्य थे। दरअसल, हाउसिंग बोर्ड ने क्लब के संचालन का अधिकार इमिनेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया था। तब हरबक्श बत्रा और परिवार के चार अन्य सदस्य इस कंपनी के डायरेक्टर थे। क्लब के संचालन के लिए ये पांच लोग ही कानूनी तौर पर जिम्मेदार हैं, क्योंकि हाउसिंग बोर्ड की शर्तों के मुताबिक कंपनी ना तो क्लब के संचालन का अधिकार किसी दूसरे को बेच सकती है, ना दे सकती है। इस लिहाज से क्लब में जो कुछ हुआ, उनमें ये लोग भी जिम्मेदार होंगे।
हरबक्श बत्रा ने एक तरफ तो पुलिस को बयान दिया कि उसने क्लब के संचालन का अधिकार जैन और सिंघानिया परिवार को सौंप दिया है, लेकिन जब हाउसिंग बोर्ड का डंडा चला तो वहां गिरगिट की तरह रंग बदल लिया। उसने लिखित में जवाब दिया कि क्लब का संचालन वो खुद और उनकी कंपनी ही कर रही है। हां, व्यस्तता के चलते दिन प्रतिदिन के काम काज के लिए जनवरी 2020 में चंपालाल जैन और हर्षित सिंघानियां को नया डायरेक्टर बनाया है।
ये सारी बातें मीडिया में शीशे की तरफ साफ हो कर रिपोर्ट हुई, लेकिन लगता है, पुलिस इसे समझ नहीं पा रही है. इसलिए अब तक पुलिस के एफआईआर में हरबक्श सिंह बत्रा और उनके परिवार के बाकी चार सदस्यों का नाम नहीं जुड़ा। मीडिया में जब तमाम बातों का खुलासा सबूत के साथ हुआ, तब पुलिस ने बत्रा से कंपनी के पूरे डायरेक्टर की लिस्ट मांगी। बत्रा ने 8 नामों की लिस्ट भी सौंप दी, जिनमें केवल दो नाम ऐसे हैं, जिन पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई…। ये नाम हैं राजधानी के बिल्डर सुबोध सिंघानिया का बेटा हर्षित सिंघानिया और चंपालाल जैन। बाकी छह नाम अब तक पुलिस की कार्रवाई से बचे हैं या बचाए गए हैं। पुलिस की दलील है कि आगे कार्रवाई करने से पहले वह इन नामों को कंपनी मामलों के विभाग से तस्दीक करना चाहती है। इसलिए, बिलासपुर के कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय को पत्र लिखा गया. वहां से जवाब नहीं मिलने पर दिल्ली की मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स अफेयर्स विभाग को पत्र लिखने की बात कही गई। लेकिन पुलिस जो जवाब चाह रही है उसे कोई भी आम व्यक्ति 50 रूपये की ऑनलाइन शुल्क चुका कर हासिल कर सकता है। बस पुलिस को यह बात नहीं समझ आ रही है।
बहरहाल, कलेक्टर और एसपी के आदेशों की धज्जियां उड़ा कर रसूखदारों के क्लब में रसूखदारों की पार्टी हुई, लेकिन कार्रवाई ऐसी कि फॉर्मेलिटी करने पुलिस को आरोपी के घर जाना पड़ा। आश्चर्य यह है कि रसूखदार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए पुलिस ने अग्रिम जमानत लेने का पूरा मौका दिया। जब हाईकोर्ट से बेल मिल गई तो पुलिस ने कागजी कार्रवाई करके आदरपूर्वक गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की। ये रायपुर पुलिस पर सवाल उठा रहा है।
ज्ञातव्य है, 27 सितंबर को ईवेंट करानी वाली रायपुर की युवती मीनल मांडविया और एक बड़े कारोबारी के पुत्र अमित धावन ने राजवीर कौर नाम की युवती की जन्मदिन पार्टी के लिए कमरा बुक कराया था। इस पार्टी में शामिल होने के लिए दुर्ग भिलाई से युवक युवतियां पहुंचे थे। कुछ लोग क्वींस क्लब इसलिए भी पहुंचे थे क्योंकि दुर्ग-रायपुर में लॉकडाउन के दौरान शराब दुकानें बंद थी। लेकिन इनके पास खबर थी कि रायपुर के क्वींस क्लब में लॉकडाउन के दौरान भी शराब मिल रही है। फायरिंग करने वाले शख्स हर्षद पाटिल ने मीडिया में ऐसा ही बयान दिया। इस पार्टी में क्लब का संचालक हर्षित सिंघानिया भी मौजूद था।

 

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