बीजेपी को समर्थन देने के मसले पर अमित जोगी घर में ही घिरे…. देवव्रत सिंह ने पूछा- बीजेपी को समर्थन देने का फैसला क्यों लिया ? ये समझ से परे हैं….विधायकी छोड़ने की नसीहत पर अमित जोगी पर भड़के… कहा- खुद क्यों 2018 तक बने रहे थे विधायक

बीजेपी को समर्थन देने के मसले पर अमित जोगी घर में ही घिरे…. देवव्रत सिंह ने पूछा- बीजेपी को समर्थन देने का फैसला क्यों लिया ? ये समझ से परे हैं….विधायकी छोड़ने की नसीहत पर अमित जोगी पर भड़के… कहा- खुद क्यों 2018 तक बने रहे थे विधायक


राजनांदगांव 31 अक्टूबर 2020। जोगी कांग्रेस के बीजेपी को समर्थन देने के सवाल पर अब जोगी कांग्रेस के विधायकों ने ही सवाल खड़े कर दिये हैं। देवव्रत सिंह ने बीजेपी के समर्थन का कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि ऐसी क्या परिस्थिति बन गयाहै कि जोगी कांग्रेस को बीजेपी को समर्थन देना पड़ रहा है। देवव्रत सिंह ने साफ कहा कि ऐसा निर्णय कभी भी नहीं लिया। मरवाही के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा कांग्रेस की लाइन पर ही निर्णय लिया है, फिर ऐसी क्या स्थिति बनी कि अमित जोगी ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।

उन्होंने कहा कि जोगी परिवार का बहुत अच्छा संबंध गांधी परिवार से रहा है, इन हालात के बीच भी भाजपा को समर्थन देने का निर्णय कैसे लिया गया, ये समझ से परे हैं। उन्होंने कहा कि अमित जोगी ने बेटे के जन्म पर भी उन्हें पत्र लिखा था और उनके लिए नाम के सुझाव मांगे थे। जवाब भी सोनिया गांधी ने दिया था और नाम बताये थे। जिस परिवार ने जोगी परिवार को इतना कुछ दिया, वो इस तरह का निर्णय लें तो बहुत ज्यादा हैरानी होती है।

खैरागढ़ में जोगी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े देवव्रत सिंह ने के बार फिर साफ किया कि सरकार अच्छा काम करती है तो उसकी तारीफ करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अजीत जोगी ने बिलासपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मरवाही को जिला बनाने की मांग रखी थी और भूपेश बघेल ने मरवाही, पेंड्रा, गौरेला को जिला बनाया। खुद के कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर देवव्रत संह ने कहा कि उन्होंने अभी कांग्रेस ज्वाइन नहीं किया है, लेकिन वो पहले ही साफ कर चुके हैं, उनके खून में कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि अजीत जोगी की पार्टी से चुनाव जरूर जीता हूं, लेकिन अच्छा और बुरे फैसले पर आलोचना और तारीफ करना अपनी भावना को व्यक्त करने जैसा है।

उन्होंने अमित जोगी के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें अमित जोगी ने देवव्रत सिंह को इस्तीफा देने और हाथ छाप से चुनाव लड़ने की नसीहत दी थी। देवव्रत ने कहा कि उनका भविष्य जनता तय करेगी। जिस वक्त वो चुनाव लड़े, वो छाप जरूर अजीत जोगी की पार्टी का था, लेकिन वो चुनाव जनता के आशीर्वाद से जीते हैं। उन्होंने साफ किया कि वो इस्तीफा नहीं देंगे और अपनी विधायकी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने अमित से सवाल पूछा कि जो उन्होंने मुझे विधायकी छोड़ने की नसीहत दी है, खुद 2018 तक कांग्रेस में क्यों रहे। 2016 में पार्टी बनी थी तो उसी वक्त इस्तीफा दे देते और चुनाव लड़ लेते।

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