चिकित्सकों ने बताया..दो परिवारों को मिलती है खुशी..इस काम को करने से…रोशन होती है दो लोगों की दुनिया

चिकित्सकों ने बताया..दो परिवारों को मिलती है खुशी..इस काम को करने से…रोशन होती है दो लोगों की दुनिया

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बिलासपुर—- सिम्स में 35 वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में कार्यशाला के माध्यम से लोगों में नेत्रदान को लेकर जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान कोरोना काल को देखते हुए शासन के दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन भी किया जा रहा है।

 

        हर साल की तरह इस साल भी  सिम्स मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभाग के प्रयास से नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ नेत्रदान के प्रति लोग जागरूक कर रहे हैं। बताते चलें कि पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन 27 अगस्त से शुरू किया गया है।

 

          सिम्स में आयोजित नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम की कड़ी में शुक्रवार को हॉस्पिटल कॉर्निया रेट्राईवल प्रोग्राम विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. मीता श्रीवास्तस्व ने बताया कि नेत्रदान कोई भी जाति, धर्म एवं लिंग का व्यक्ति कर सकता है। नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के अंदर किया जाना होता है। किसी व्यक्ति के मृत्यु के साक्षी होने पर परिवार के लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना होगा। नेत्रदान के लिए आवश्यक बातें जैसे- मृत शरीर के आँखों में गीली पट्टी या रुई रखना, सिर के नीचे 2 तकिया रखना और पंखा बंद रखना बहुत जरूरी है। 

 

              डॉ. सुचिता सिंह ने बताया कि नेत्रदान के लिए नेत्र बैंक की टीम 24 घंटे तैयार रहती है। नेत्रदान में कॉर्निया को लिया जाता है। नेत्रदान की प्रकिया में 15-20 मिनट का समय पर्याप्त होता है। कॉर्निया प्राप्त करने और जांच के बाद रजिस्टर्ड मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए बुलाया जाता है। कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद मरीजों को रखने वाली सावधानियों के बारे में बताया भी जाता है।

 

               धर्मेंद्र देवांगन ने जानकारी दी कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो परिवार के व्यक्ति को सहानुभूति पूर्वक बताया जाता है कि शरीर नश्वर है और हमें एक न एक दिन शरीर त्यागना है। लेकिन दुनिया से जाने के बाद भी हमारी आखों से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से ग्रसित व्यक्ति दुनिया को देख सकते हैं। जिसमें अधिकतर 12-14 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। नेत्रदान से 2 लोगों को रोशनी मिलती है। 2 परिवार में खुशिया आती हैं।

 

            कार्यक्रम में नेत्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीता श्रीवास्तव, असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. सुचिता सिंह एवं नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन ने नेत्रदान के बारे में जानकारी दी। विभाग के चिकित्सक डॉ. मोनिका महिलांग, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. धनश्री साहू, डॉ. प्रणव दिघे, पीजी  स्टूडेंट्स,  इंटर्न्स, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन स्टाफ और वार्ड बॉय इस दौरान मौजूद थे।

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