कोरोना संक्रमण की लम्बी होती लिस्ट और VIP के शामिल होने के बाद भी हम क्यों नहीं ले रहे सबक..?

कोरोना संक्रमण की लम्बी होती लिस्ट और VIP के शामिल होने के बाद भी हम क्यों नहीं ले रहे सबक..?

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बिलासपुर(रुद्र अवस्थी)।वक्त गुजरने के साथ ही कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और कई वीआईपी भी संक्रमित मरीजों की  फेहरिस्त में शामिल हो रहे हैं  । बिलासपुर में नगर निगम सभापति, महापौर के बाद जिला कलेक्टर की रिपोर्ट में पॉजिटिव आई है । जिले में सीपत थाने को इसी वजह से बंद करने का भी आदेश दिया गया है । पुलिस अधिकारियों के कोरोना पॉजिटिव  पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है । सरकारी सिस्टम में शामिल लोगों के पॉजिटिव आने और क्वारंटाइन होने की वजह से जाहिर सी बात है कि सरकारी कामकाज में विपरीत असर पड़ रहा है और कई काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं।  फिर भी यह बात देखने में आ रही है कि लोग कोरोना संक्रमण की चर्चा शुरू होने के समय पिछले मार्च-अप्रैल में जितने भयभीत सावधान और सतर्क नजर आते थे ।

 इसमें अब काफी कमी आई है ।  लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद सड़क, बाजारों, चौक -चौराहों पर जिस तरह की भीड़ नजर आती है , उससे आने वाले समय की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है । जब तक कोरोनावायरस का टीका आम लोगों तक न पहुंच जाए तब तक सतर्कता ही इसका उपाय है । जिसे संजीदगी से लिए बिना हालात से मुकाबला करना कठिन नजर आता है।  जिस पर आम लोगों को बहुत ध्यान देने की जरूरत है । कम से कम कोरोना संक्रमित लोगों की फेहरिश्त को देखकर सबक लेना चाहिए।

जेईई और नीट परीक्षा का विरोध और कांग्रेसियों के मन की बात

मेडिकल और इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए होने वाली जेईई और नीट परीक्षा को लेकर सियासी सरगर्मी चल रही है । कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक इसका विरोध किया है । इस सिलसिले में कांग्रेस की ओर से बिलासपुर जिले में भी धरना प्रदर्शन किया गया । कांग्रेसियों का कहना है कि पूरा देश कोरोना से परेशान है ।  लोग इसके संक्रमण से बचने के लिए जतन कर रहे हैं । लेकिन केंद्र सरकार परीक्षा आयोजित कराने की जिद पर अड़ी हुई है । बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए परीक्षा के आयोजन पर फिर से विचार करने की मांग की जा रही है । उनका यह भी कहना है कि सरकार में बैठे लोग अपने मन की बात करते हैं । लेकिन उन्हें छात्र-छात्राओं के मन की बात भी सुन लेना चाहिए । उन्होंने परीक्षा के आयोजन में छात्र छात्राओं को होने वाली दिक्कतों का भी जिक्र किया है । इस मामले में अब तक जो स्थिति सामने आ रही है उससे लगता है कि जेईई और नीट की परीक्षा तय समय पर होगी।  कांग्रेस का विरोध केवल सांकेतिक बनकर रह जाएगा । इस मामले  में छात्र-छात्राओं के मन की बात क्या है….?  यह तो छात्र-छात्राएं ही जानते हैं । लेकिन विरोध प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस  के लोगों ने अपने मन की बात जरूर जाहिर कर दी कि दिल्ली सरकार के विरोध में खड़े होने के हर एक मौक़े पर हम आगे ही रहेंगे।

बिलासपुर के जनदबाव की मुहिम का असर

इस हफ्ते बिलासपुर के लिए एक अच्छी खबर आई कि बिलासपुर – भोपाल हवाई सेवा को  केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई  है ।  खास बात यह है कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने खुद ट्वीट कर बिलासपुर -भोपाल हवाई सेवा की खबर दी और लोगों को शुभकामनाएं भी दीं।  जबकि इसी दिन देश के अन्य हिस्सों में जो 78 रूट पर हवाई सेवा शुरू करने का ऐलान किया गया ,उसकी सूची विभाग के सचिव ने जारी की । यह इस बात का सबूत है कि विभाग के मंत्री और केंद्र सरकार के सामने बिलासपुर हवाई सेवा को लेकर कितना दबाव महसूस किया जा रहा था और इस मांग को कितनी अहमियत दी जा रही थी । बिलासपुर को हवाई सेवा से जोड़ने की मांग को लेकर लोगों की मुहिम पिछले काफी समय से जारी थी । इस सिलसिले में हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने पिछले साल अक्टूबर से लेकर लगातार अखंड धरना दिया और हर स्तर पर यह मांग उठाई गई । बिलासपुर के सांसद अरुण साहू ने भी  अपने स्तर पर ठोस पहल की । जिससे बिलासपुर को एक बार फिर जन आंदोलन के दबाव से यह तोहफा मिल सका  । हालांकि  बिलासपुर- भोपाल हवाई सेवा को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है । यह मांग फिर से पुरजोर तरीके से उठ रही है कि दिल्ली- मुंबई -कोलकाता -बेंगलुरु -पुणे जैसे महानगरों के साथ भी हवाई सेवा जोड़ी जानी चाहिए ।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी ट्वीट कर इसका समर्थन किया है । वैसे जिस तरह इस मुद्दे को केंद्र सरकार ने अहमियत दी है उससे उसे देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिए कि बिलासपुर को महानगरों से जोड़ने के लिए भी जल्दी ही कोई फैसला हो सकता है ।

क्या अब गरीब़ों को मिल पाएगी उनके हक़ की ज़मीन… ?

शहर में आवासीय कॉलोनियों के तेजी से हो रहे निर्माण के बीच आर्थिक रूप से कमजोर        (ईडब्ल्यूएस) लोगों के लिए छोड़ी जाने वाली जमीन का लाभ वास्तविक रुप से गरीबों को मिलता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है । इस पर समय -समय पर बात होती रहती है । लेकिन हाल ही में बिलासपुर सहकारी गृह निर्माण समिति की ओर से डायरेक्टर पी आर यादव की याचिका पर हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है ,उससे यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है । हाईकोर्ट ने शहर की अज्ञेय नगर कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस के लिए सुरक्षित जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को पर रोक लगा दिया है ।  पीआर यादव की इस याचिका के जरिए ईडब्ल्यूएस की जमीन को लेकर चल रही चल रहे गड़बड़झाले की पूरी तस्वीर सामने आ गई है ।  जिसमें  उन्होंने बताया था की हाउसिंग सोसायटी ने अज्ञेय नगर कॉलोनी में 1 एकड़ 9 डिसमिल जमीन ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित की थी । 30 साल गुज़रने के बाद भी नगर निगम ने इस जमीन का आवंटन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नहीं किया ।  इसी तरह उन्होंने हाउसिंग सोसाइटी की दूसरी कालोनियों का भी उदाहरण दिया है । जिसमें डी पी चौबे नगर, स्वर्ण जयंती नगर शामिल है । इसी तरह और भी प्राइवेट कॉलोनाइज़र की  कॉलोनियों में छोड़ी गई ईडब्लूएस की  जमीन का आवंटन पात्र गरीबों को नहीं किया गया ।  जिससे अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं । उनका यह भी कहना है कि विधिवत जमीन आवंटन नहीं कर नगर निगम भू माफियाओं को बेजा कब्जा का अवसर दे रहा है और मूकदर्शक बना हुआ है । यह मामला सामने आने और हाईकोर्ट की रोक के बाद उम्मीद की जा रही है कि कालोनियों में छोड़ी गई जमीन का आवंटन इसके हक़दार गरीबों को हो सकेगा ।

कोरोना काल में ख़ामोश हुए साउंड सर्विस

कोरोना काल में वैसे तो सभी तबके के लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं और छोटे – बड़े सभी तरह के कारोबार पर इसका गहरा असर पड़ा है । लेकिन साउंड सर्विस टेंट  जैसे कारोबार से जुड़े लोगों के सामने गंभीर संकट की स्थिति है ।  इसका प्रदर्शन करते हुए साउंड सर्विस वालों ने सैकड़ों की संख्या में एक रैली निकाली और लिखित में जिला प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा जताई । गाजे-बाजे, डीजे के साथ किए गए इस प्रदर्शन में उनके जरिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की गई कि  लॉकडाउन के दौरान शादी -ब्याह और दूसरे आयोजन बंद हैं  । जिससे साउंड सर्विस वालों के परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत है । उम्मीद थी कि गणेश पूजा के दौरान उन्हें काम मिल सकता है । लेकिन इस समय भी पूरी तरह से पाबंदी रही । अब आगे दुर्गा पूजा को देखते हुए उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें अनुमति दी जानी चाहिए । जिससे उनका परिवार चल सके ।  उनकी गुहार का कितना असर होगा यह तो आने वाले समय में ही पता लग सकेगा । लेकिन हालात बयान  कर रहें हैं कि उनकी सुध लेने किए व्य़वस्था के ज़िम्मेदार लोगों को आगे आना चाहिए।

कोयला कर्मियों को एसईसीएल का तोहफ़ा

कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चिंता बढ़ी है और इसे लेकर ठोस इंतजाम किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है । सबसे अधिक मुनाफा देने वाली कोयला कंपनी एसईसीएल मैनेजमेंट में भी इस सिलसिले में पहल की है । एसईसीएल मैनेजमेंट ने अपने अस्पतालों के लिए 69 एंबुलेंस मुहैया कराए हैं  । जिसमें से 63 एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाले होंगे । जिसमें ऑक्सीजन सप्लाई से लेकर व्हील चेयर,  सलाइन आदि की व्यवस्था भी रहेगी  । इसी तरह पांच एडवांस लाइफ सपोर्ट प्रणाली वाले एंबुलेंस भी मुहैया  कराए जा रहे हैं । जिसमें सभी सुविधाओं के साथ वेंटिलेटर का भी इंतजाम होगा । एसईसीएल ने अपने 49 हज़ार  कर्मियों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा के रूप में यह तोहफा दिया है । जाहिर सी बात है कि इससे लोगों को सहूलियत मिल सकेगी और वह कोयला उत्पादन में बेहतर योगदान दे सकेंगे ।  हालांकि ऐसे इंतज़ाम भी ज़रूरी हैं , जिससे लोगों को जल्दी से जल्दी इसका लाभ मिल सके।

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