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कोरोना काल में खूब किया गिलोय का इस्तेमाल अब लिवर हो गया बीमार, पेट में बने खून के थक्के

कोरोना काल में खूब किया गिलोय का इस्तेमाल

कोरोना काल में लोगों ने इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए तुलसी, गिलोय और अलग-अलग काढ़े का खूब इस्तेमाल किया था. अब, एक ताजा रिसर्च में बताया गया है ये आपके लिवर के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है.

कोरोना काल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए डाक्टरों की सलाह के बिना लोगों ने खूब गिलोय के कैप्सूल खाए। इससे पेट में खून के थक्के बन गए हैं और लिवर फंक्शन खराब हो गया है। शोध में इसकी पुष्टि हुई है।

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से पेट में छिपे रोगों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। पेट और आंतों के ट्यूमर, पैनक्रियाइटिस व पथरी का भी पता लगा सकते हैं। उसी समय उसे हटाया भी जा सकता है। बड़ी आंत 28 व छोटी आंत 15 फीट लंबी होती है। इसकी गड़बड़ी भी एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से पकड़ सकते हैं। यह ट्यूमर और गैस्ट्रो जिजनास्टमी में भी कारगर है। पित्त की नली में पथरी चिपकने पर निकालना संभव है।

इंटरवेंशनल रेडियोलाजी में जटिलताएं कम
इंटरवेंशनल रेडियोलाजी ने मरीजों में रोग की जटिलाओं को काफी हद तक कम किया है। जनरल सर्जरी की तुलना में अल्ट्रासाउंड गाइडेड, सीआर्म गाइडेड, सीटी व एमआरआइ गाइडेड इंटरवेंशन के जरिए जोखिम और दर्द होता है। उन्होंने कहा कि अब इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट एंजियोप्लास्टी, स्टंटिंग, जलोदर टैप, पित्त फ्लूड निकालना, बर्सल इंजेक्शन लगाना भी संभव है। इमेज गाइडेड लिवर बायोप्सी भी आसानी से की जा सकती है। इस दौरान, कार्यक्रम निदेशक डा. विकास गुप्ता, चेयरपर्सन डा. अशोक वर्मा, डा. अजय तिवारी व डा. देवज्योति देवराय रहे।



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